Ranchi: राज्य के सरकारी विभागों से एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. राज्य भर में कुल 40,191 कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं (सर्विस बुक) अब तक लॉक नहीं की जा सकी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 34,039 सेवा पुस्तिकाएं कोषागार में लंबित हैं, जबकि 6,152 अभी तक कोषागार तक पहुंच ही नहीं पाई हैं. इस अव्यवस्था के मामले में राजधानी रांची और जमशेदपुर सबसे आगे हैं, जबकि छोटे जिलों की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है.
सभी कोषागारों में लंबित कर्मचारियों की संख्या और प्रतिशत का ब्यौरा
• रांची और डोरंडा: राजधानी रांची में सबसे अधिक 3,836 और डोरंडा में 2,438 (7.2%) कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं अनलॉक हैं.

• जमशेदपुर और धनबाद: औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में 3,090 (9.1%) और धनबाद में 2,405 (7.1%) कर्मियों का डेटा अटका हुआ है.
• हजारीबाग और बोकारो: हजारीबाग में 2,195 (6.4%) और बोकारो में 1,894 (5.6%) का आंकड़ा है.
• पलामू और लातेहार: पलामू में 2,080 (6.1%) और लातेहार में 1,781 (5.2%) सेवा पुस्तिकाएं लंबित हैं.
• गुमला और गिरिडीह: गुमला में 1,536 (4.5%) और गिरिडीह में 1,239 (3.6%) कर्मचारियों का कार्य अधूरा है.
• चाईबासा और गढ़वा: चाईबासा में 1,065 (3.1%) और गढ़वा में 1,000 (2.9%) संख्या दर्ज है.
• देवघर, चतरा और साहेबगंज: देवघर में 989 (2.9%), चतरा में 983 (2.9%) और साहेबगंज में 792 (2.3%) का मामला है.
• कोडरमा, दुमका और गोड्डा: कोडरमा में 729 (2.1%), दुमका में 714 (2.1%) और गोड्डा में 710 (2.1%) कर्मी सूची में हैं.
• जामताड़ा और प्रोजेक्ट भवन: जामताड़ा में 638 (1.9%) और प्रोजेक्ट भवन में 501 (1.5%) मामले लंबित हैं.
• लोहरदगा और रामगढ़: लोहरदगा में 437 (1.3%) और रामगढ़ में 435 (1.3%) का डेटा पेंडिंग है.
• सिमडेगा और पाकुड़: सिमडेगा में 357 (1%) और पाकुड़ में 277 (0.8%) कर्मी प्रभावित हैं.
• खूंटी और तेनुघाट: खूंटी में 275 (0.8%) और तेनुघाट में 197 (0.6%) मामले हैं.
• सरायकेला, चक्रधरपुर और गढ़वा: सरायकेला में 770 (2.3%), चक्रधरपुर में 152 (0.4%) और गढ़वा में 150 (0.4%) संख्या है.
• राजमहल, घाटशिला और मधुपुर: राजमहल में 151 (0.4%), घाटशिला में 105 (0.3%) और मधुपुर में 100 (0.3%) मामले दर्ज हैं.
• महेशपुर: महेशपुर में सबसे कम केवल 72 (0.2%) कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं अनलॉक हैं.
क्या होगा नुकसान
• सेवा पुस्तिकाओं का समय पर लॉक न होना सीधे तौर पर कर्मचारियों के वेतन निर्धारण, प्रमोशन, एसीपी–एमएसीपी और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले पेंशन लाभों को प्रभावित करता है.
• डेटा डिजिटल रूप से फ्रीज नहीं होता, तो कर्मियों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं.
