न्यूज वेव खास: फाइलों में कैद हुए जंगल, फील्ड में अफसरों का अकाल, झारखंड में आइएफएस के 60 पद खाली, प्रभार में चल रहा तंत्र

Ranchi : झारखंड वन विभाग में भारतीय वन सेवा (आइएफएस ) अधिकारियों की संख्या काफी चौंकाने वाली हैं. मुख्यालय में बैठने वाले...

Ranchi : झारखंड वन विभाग में भारतीय वन सेवा (आइएफएस ) अधिकारियों की संख्या काफी चौंकाने वाली हैं. मुख्यालय में बैठने वाले आला अधिकारियों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन जमीन पर जंगलों को बचाने के लिए जरूरी फील्ड कमांडर्स की भारी कमी हैं. झारखंड कैडर में आइएफएस के 143 पद स्वीकृत हैं. जिसमें 83 अफसर ही कार्यरत हैं. 60 पद रिक्त पड़े हैं.

केंद्रीय और राज्य प्रतिनियुक्ति में तैनात हैं अफसर

झारखंड कैडर के एक दर्जन अफसर अधिकारी वर्तमान में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, संस्थानों या अन्य केंद्रीय निकायों में तैनात हैं. वहीं राज्य प्रतिनियुक्ति में 7 अधिकारी राज्य के अन्य विभागों (जैसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यटन या झारक्राफ्ट) में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं. नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य कैडर के कुल सीनियर ड्यूटी पोस्ट का अधिकतम 20 फीसदी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित होता है. झारखंड के मामले में, रिक्तियों की अधिक संख्या के कारण फील्ड स्तर पर अधिकारियों की कमी ज्यादा महसूस की जा रही है.

पड़ोसी राज्य बिहार और उड़ीसा से अधिक हैं झारखंड मे आइएफएस के पद

पड़ोसी राज्य उड़ीसा और बिहार से अधिक झारखंड में आइएफएस के पद स्वीकृत हैं. उड़ीसा में आईएफएस अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 141 है. वर्तमान में 11 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. बिहार कैडर की अधिकृत क्षमता 107 है. जबकि झारखंड में आइएफएस के 143 पद स्वीकृत हैं.

वन विभाग मुख्यालय में अफसरों की क्या है स्थिति

  • ऽ विभाग के सबसे बड़े पद प्रधान मुख्य वन संरक्षक पर 04 अधिकारी तैनात हैं. इनमें संजीव कुमार के साथ विश्वनाथ शाह, डॉ. अर्त त्राण मिश्रा और रवि रंजन शामिल हैं.
  • ऽ अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक रैंक के 06 अधिकारी हैं.
  • ऽ मुख्य वन संरक्षक जो क्षेत्रीय और मुख्यालय स्तर पर समन्वय के लिए हैं. इस पद पर 05 अधिकारी तैनात हैं.
  • ऽ वन संरक्षक पद पर पांच अफसर हैं.
  • ऽ जिला और प्रमंडल स्तर पर 47 अधिकारी तैनात हैं.

 

अफसरों की कमी का क्या पड़ रहा प्रभाव

वरिष्ठ अधिकारियों का एक बड़ा हिस्सा राजधानी रांची या क्षेत्रीय मुख्यालयों में तैनात है. इसके विपरीत, वन प्रमंडल पदाधिकारी के पास संसाधनों और बैकअप की कमी है. हाथी मानव द्वंद्व, अवैध लकड़ी तस्करी और जंगलों में आग जैसी घटनाओं के समय फील्ड अधिकारियों को त्वरित निर्णय लेने के लिए जिस स्वायत्तता की जरूरत होती है, वह अक्सर वरिष्ठों के हस्तक्षेप में दब जाती है.

वनीकरण पर पड़ रहा प्रभाव

झारखंड में वर्तमान में कैंपा फंड के हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद वनीकरण की रफ्तार धीमी है. वन्यजीव गलियारों का निर्माण अटका हुआ है.अधिकारियों की कमी और कई वरिष्ठ अधिकारियों के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण, राज्य में तैनात कई अधिकारियों को एक साथ दो या तीन प्रभार संभालने पड़ रहे हैं.

 

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