Ranchi : देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी 18वीं लोकसभा के अब तक के सत्रों में झारखंड के सांसदों का परफॉर्मेंस आंकड़ा सामने आया है. आधिकारिक आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता ने जिन चेहरों को अपनी किस्मत का फैसला करने और राज्य के जल-जंगल-जमीन की आवाज बनने के लिए दिल्ली भेजा था, उन्होंने वहां जाकर क्या किया. 18वीं लोकसभा के सत्रों के दौरान झारखंड के सभी लोकसभा सांसदों की ओर से पूछे गए कुल सवालों की सटीक और पिन-पॉइंट संख्या 1,056 है. राज्य के कुल 14 सांसदों ने मिलकर देश और राज्य से जुड़े अलग-अलग मंत्रालयों से एक हजार से अधिक सवाल पूछे हैं. हालांकि, इस आंकड़े के भीतर की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है, क्योंकि कुल पूछे गए सवालों में से आधे से अधिक सवाल सिर्फ दो से तीन सांसदों के नाम दर्ज हैं.
डॉ. निशिकांत दुबे : सवालों के महायोद्धा
गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने संसद में सवालों के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है. उन्होंने अकेले ही 217 सवाल दागकर यह साबित कर दिया कि वे सदन की कार्यवाही को कितनी गंभीरता से लेते हैं. निशिकांत दुबे ने नागरिक उड्डयन (देवघर एयरपोर्ट और नए हवाई मार्ग), जल शक्ति मिशन, डिजिटल लर्निंग और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड के झारखंड में आवंटन को लेकर सीधे मंत्रालयों को कटघरे में खड़ा किया.

विष्णु दयाल राम : पलामू की आवाज को संसद में दी नई धार
पलामू के सांसद और पूर्व आईपीएस अधिकारी विष्णु दयाल राम ने भी सदन के भीतर जबरदस्त सक्रियता दिखाई है. उन्होंने कुल 202 सवाल पूछे. वीडी राम ने स्मार्ट सिटी मिशन, दिवाला और दिवालियापन संहिता, किसान क्रेडिट कार्ड और पलामू प्रमंडल में बुनियादी ढांचे व सड़कों के विकास को लेकर सिलसिलेवार सवाल पूछे.
चंद्रप्रकाश चौधरी : गिरिडीह के मुद्दों पर सरकार को घेरा
आजसू पार्टी के कोटे से एनडीए के सांसद चन्द्र प्रकाश चौधरी ने गिरिडीह और पूरे राज्य के कोयला बेल्ट की समस्याओं को लेकर संसद में जोरदार आवाज उठाई. उन्होंने कुल 114 सवाल पूछे. चौधरी के निशाने पर मुख्य रूप से कोयला मंत्रालय, राष्ट्रीय कोयला रसद योजना, और लखपति दीदी योजना का स्टेटस रहा. उन्होंने डीवीसी द्वारा निर्मित पुलों में अनियमितता और रेल पटरियों के नवीनीकरण को लेकर भी मंत्रालयों से कड़े जवाब मांगे.
नलिन सोरेन : दुमका के नए तीरंदाज ने दी कड़ी टक्कर
झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर दुमका से चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे अनुभवी नेता नलिन सोरेन ने संसद में पदार्पण के साथ ही धमाकेदार पारी खेली है. उन्होंने कुल 109 सवाल पूछकर विपक्ष की ओर से झारखंड का मोर्चा संभाला. सोरेन ने अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, और पीएम विश्वकर्मा योजना के जमीनी असर पर सवाल उठाकर केंद्र सरकार को घेरा.
काली चरण सिंह : चतरा के नए सांसद की प्रभावी शुरुआत
चतरा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुए काली चरण सिंह ने भी अपनी पहली ही पारी में संसद के भीतर अच्छी उपस्थिति दर्ज कराई है. उन्होंने अब तक 77 सवाल पूछे हैं. उन्होंने मुख्य रूप से उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में फायर सर्विसेज के आधुनिकीकरण, उर्वरक सब्सिडी, सेल, के कारखानों में होने वाली दुर्घटनाओं और इंटरनेट पेनेट्रेशन जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया.
जोबा माझी : सिंहभूम की जमीनी हकीकत और सीमित सवाल
सिंहभूम सीट से झामुमो की सांसद जोबा माझी ने संसद में कुल 28 सवाल पूछे हैं. हालांकि उनके सवालों की संख्या कम है लेकिन उनके सवाल बेहद चुनिंदा और झारखंड के कोर मुद्दों से जुड़े थे. उन्होंने चाईबासा और पश्चिमी सिंहभूम में लौह अयस्क खनन के पर्यावरण पर प्रभाव, चक्रधरपुर रेलवे डिवीजन में पैसेंजर ट्रेनों के बंद होने और ‘हो’ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने जैसे गंभीर मुद्दों को संसद पटल पर रखा.
मंत्रियों की मजबूरी और कुछ का मौन
झारखंड के बाकी सांसदों की बात करें तो कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी और रांची के सांसद संजय सेठ (जो राज्यसभा में हैं और कुछ लोकसभा से केंद्रीय मंत्रीमंडल का हिस्सा रहे या रहे हैं) मंत्रियों के रूप में सरकार का हिस्सा होने के कारण तकनीकी रूप से सवाल नहीं पूछ सकते, क्योंकि वे खुद सवालों का जवाब देने वाली पीठ पर बैठते हैं. वहीं हजारीबाग से नए सांसद मनीष जायसवाल, धनबाद के ढुलू महतो, जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो, खूंटी के कालीचरण मुंडा, लोहरदगा के सुखदेव भगत और राजमहल के विजय हांसदा जैसे सांसदों ने डिबेट (बहस) और शून्यकाल में तो कई बार हस्तक्षेप किया और अपने क्षेत्रों की आवाज उठाई, लेकिन ‘लिखित और तारांकित’ प्रश्नों के मामले में इनका प्रदर्शन उम्मीद से थोड़ा कम रह. इन सांसदों के सवाल पूछने का औसत दहाई के आंकड़े के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया.
सांसदों द्वारा पूछे गए प्रमुख सवालों की फैक्ट फाइल
• कोयला खदान और विस्थापन : कोल बियरिंग क्षेत्रों की लीजिंग, स्थानीय विकास में कोयला कंपनियों का योगदान और खदान सुरक्षा से जुड़े दर्जनों सवाल मंत्रालयों से पूछे गए.
• आदिवासी और कमजोर वर्ग कल्याण : पीवीजीटी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) क्षेत्रों में सेवा वितरण को मजबूत करने और आदिवासियों के लिए न्याय व्यवस्था पर तीखी बहस हुई.
• रोजगार और श्रम सुधार : ई-श्रम पोर्टल पर असंगठित मजदूरों के पंजीकरण की सुस्त रफ्तार और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर श्रम मंत्रालय से जवाब मांगा गया.
• स्वास्थ्य और कुपोषण : झारखंड के आदिवासी बहुल जिलों में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की प्रगति और महिलाओं-बच्चों में कुपोषण के आंकड़ों पर सवाल दागे गए.
• रेल और बुनियादी ढांचा : राज्य में नई रेल लाइनों की सुस्त रफ्तार और ग्रामीण सड़कों के अपग्रेडेशन पर मंत्रियों को जवाब देने के लिए मजबूर किया गया.
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