Ranchi: झारखंड के सरकारी महकमों में फाइलों की सुस्ती और अफसरों की लालफीताशाही अब कर्मचारियों की जेब पर भारी नहीं पड़ेगी. राज्य सरकार ने सरकारी कर्मियों के वेतन और भत्तों के भुगतान में हो रही अनावश्यक देरी को गंभीरता से लिया है. वित्त विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि बाबुओं की लेट-लतीफी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण अब मेहनतकश कर्मचारियों को समय पर सैलरी से वंचित नहीं रहना पड़ेगा. इस बाबत वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने 30 जुलाई को एक सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी कर दिया है.

झारखंड कोषागार संहिता, 2016 के नियम-139 का पालन अनिवार्य
शिकायतों के मुताबिक, कई विभागों और कार्यालयों में फाइलों को जानबूझकर या लापरवाही के कारण लटकाए जाने से कर्मचारियों को समय पर वेतन और भत्ते नहीं मिल पा रहे थे. इसे शासन स्तर पर गंभीर कदाचार माना गया है. वित्त विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, प्रमंडलीय आयुक्तों, उपायुक्तों और कोषागार अधिकारियों को निर्देश दिया है कि झारखंड कोषागार संहिता, 2016 के नियम-139 का अक्षरशः और सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए.
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वेतन भुगतान को लेकर तय की गई नई समय-सीमा
- बिल जमा करने की प्रक्रिया: अब कर्मचारियों के वेतन और भत्ते के बिलों पर हस्ताक्षर कर उन्हें हर महीने की 25 तारीख के बाद किसी भी कार्य दिवस पर संबंधित कोषागार में जमा किया जा सकेगा.
- भुगतान की तिथिः बिलों का क्लीयरेंस और भुगतान सीधे बैंक के अंतिम कार्य दिवस पर सुनिश्चित किया जाएगा.
- आदेश की स्थिरता: यह व्यवस्था अगले सरकारी आदेश तक पूरे राज्य में अनवरत रूप से प्रभावी रहेगी.
लापरवाह अधिकारियों पर लटकी तलवार
अब वेतन भुगतान में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि इसके बाद भी किसी कार्यालय स्तर पर वेतन रोकने या बिल में देरी करने का मामला सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधी प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिरना तय माना जा रहा है.
