Ranchi: झारखंड पुलिस महकमे में इन दिनों भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की क्लीन ड्राइव ज़ोरों पर है. मगर गुरुवार का दिन पुलिसिया गलियारों में गज़ब का विरोधाभास लेकर आया. एक ही दिन दो-दो थाना प्रभारियों की किस्मत का सिक्का ऐसा उछला कि एक साहब को अदालत से बेल) मिल गई तो दूसरी मैडम जी को रिश्वत के चक्कर में जेल की हवा खानी पड़ गई.

पहला मामला : खूंटी की मैडम जी पहुँचीं जेल

सबसे ताज़ा और गरमा-गरम मामला खूंटी जिले के महिला थाने का है. यहाँ की थाना प्रभारी सुलेखा कुमारी सपना मैडम को लगा कि केस से नाम हटाना और जांच में राहत देना तो उनके बाएँ हाथ का खेल है. इसके एवज में उन्होंने 50 हजार रुपये की डिमांड रख दी. लेकिन पीड़ित भी एक से बढ़कर एक निकले.उन्होंने घूस देने के बजाय सीधे ACB रांची से हाथ मिला लिया. फिर क्या था ACB ने ऐसा जाल बिछाया कि मैडम जैसे ही नोटों की गड्डी थामने लगीं सादे कपड़ों में छिपे अफ़सरों ने उन्हें रंगे हाथ धर दबोचा. खूंटी का यह महिला थाना शायद रिश्वत के मामलों में इतिहास दोहराने का शौकीन है. साल 2021 में भी यहाँ की तत्कालीन प्रभारी मीरा कुमारी को ACB ने घूस लेते पकड़ा था. यानी एक ही थाने से दो-दो प्रभारियों का विकेट गिरना पुलिस की साख पर बड़ा चुटकुला बन गया है.

दूसरा मामला : गुमला के दरोगा जी को मिली बेल
दूसरी तरफ, गुमला के चैनपुर थाना के पूर्व प्रभारी सब-इंस्पेक्टर शैलेश कुमार के लिए गुरुवार का दिन राहत की खबर लेकर आया. साहब को इसी साल 21 जनवरी को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ACB ने गिरफ्तार किया था. निचली अदालत यानि ACB कोर्ट ने तो दरोगा जी की ज़मानत अर्जी को सीधे खारिज कर दिया था जिसके बाद साहब ने हाईकोर्ट की शरण ली. हाईकोर्ट में जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने सुनवाई के बाद आख़िरकार शैलेश जी को कुछ शर्तों के साथ बेल की संजीवनी दे ही दी. कुल मिलाकर, गुरुवार का दिन झारखंड पुलिस के लिए किसी फ़िल्मी ड्रामे से कम नहीं रहा. एक तरफ गुमला वाले साहब बेल का कागज़ पाकर राहत की सांस ले रहे हैं तो दूसरी तरफ खूंटी वाली मैडम जी एसीबी हेडक्वार्टर में मेहमान’ बनी बैठी हैं
