Pakur: पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड के चौकीढाब गांव से सरकारी जमीन को कब्जा कर जलस्रोत तालाब को भरने का एक गंभीर मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार, वर्ष 1995-96 में जवाहर रोजगार योजना के तहत करीब 100×100 फीट क्षेत्र में बनाए गए सरकारी तालाब को पूरी तरह से भरकर उस पर प्लॉटिंग कर दी गई है. ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के कुछ लोगों ने कथित रूप से इस जमीन की खरीद-बिक्री कर तालाब को भर दिया. यह मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जलस्रोत को समाप्त कर दिया गया जो गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है. नियमों के अनुसार किसी भी तालाब या पोखर की जमीन का उपयोग निजी या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता. बावजूद इसके यहां खुलेआम नियमों की अनदेखी की गई.
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जांच में खुलासा, गायब मिला तालाब
मामले की सूचना मिलते ही हिरणपुर के अंचलाधिकारी मनोज कुमार, अंचल निरीक्षक (सीआई) और अमीन की टीम मौके पर पहुंची. जांच के दौरान पाया गया कि तालाब को पूरी तरह मिट्टी से भर दिया गया है. उसका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंचलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया है. साथ ही 24 घंटे के भीतर तालाब को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश की अवहेलना करने पर सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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अदालत के आदेश की अवहेलना का मामला
बता दें कि जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त निर्देश जारी कर चुका है. अदालत के अनुसार, किसी भी जलस्रोत को भरना गैरकानूनी है और सूख चुके तालाबों को भी पुनर्जीवित करना अनिवार्य है. ऐसे में चौकीढाब का यह मामला न्यायालय के आदेश की अवहेलना के दायरे में आ सकता है. फिलहाल अंचलाधिकारी के इस त्वरित कार्रवाई से जमीन माफियाओं में खलीबली मच गई है.
