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संसद स्थगित : राज्यसभा-लोकसभा 10 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित, लोकसभा से MSME संशोधन विधेयक पारित

Parliament adjourned: राज्यसभा में सता पक्ष और विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सदन कार्यवाही 10 अगस्त सोमवार सुबह 11 बजे तक...

Parliament adjourned: Rajya Sabha-Lok Sabha adjourned till 11 am on August 10, MSME Amendment Bill passed from Lok Sabha

Parliament adjourned: राज्यसभा में सता पक्ष और विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सदन कार्यवाही 10 अगस्त सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगति कर दी गई. इससे पहले राज्यसभा के चेयरमैन ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ पर इसे याद किया. यह आंदोलन 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू किया गया था. भारत की आजादी की लड़ाई के शहीदों को सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि देते हुए, चेयरमैन ने उनके बेमिसाल साहस, त्याग और देश की आजादी के प्रति अटूट संकल्प को याद किया. उन्होंने कहा कि ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ भारत के आजादी के आंदोलन में एक अहम पड़ाव है, जो देशभक्ति, एकता और देश की निस्वार्थ सेवा के आदर्शों से पीढ़ियों को प्रेरित करता है.

राज्यसभा में खरगे ने अमित शाह की अनुपस्थिति का उठाया मुद्दा

राज्यसभा में सभापीठ की अनुमति से उठाए गए मामलों पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति और सदन के अपमान के आरोप पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया.

लोकसभा की कार्यवाही 10 अगस्त तक के लिए स्थगित

लोकसभा की कार्यवाही भी 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई. इस बीच लोकसभा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार के बाद उसे पारित किया गया. यह विधेयक ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006’ में और संशोधन करता है, जिसे राज्यसभा ने पारित किया था.

यह भी पढ़ें: JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: रांची में छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान भारी हंगामा, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकी गई

वेणुगोपाल ने कहा- FCRA का करेंगे विरोध, इसे पास नहीं करने देंगे

‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ इवेंट में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बातचीत पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘अगर वे ‘जेन-जी’ (आज की युवा पीढ़ी) के प्रति सच में ईमानदार हैं, तो उन्हें भारत के गृह मंत्री से इस्तीफा देने के लिए कहना चाहिए. वरना, उन्हें (केंद्रीय गृह मंत्री को) कम से कम संसद में आकर छात्रों से माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आरएसएस सरकार को कंट्रोल कर रही है. अगर वे छात्रों के प्रति ईमानदार हैं, तो उन्हें छात्रों पर हुए अत्याचारों की निंदा करनी चाहिए. पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया था और छात्र इसके लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. वे इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? यह सब बस दिखावा है’. वहीं, झारखंड में JPSC-JSSC उम्मीदवारों के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने, ‘हमारा रुख बिल्कुल साफ है- जहां भी छात्र अपनी जायज मांगों के लिए सही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, हम उनके साथ खड़े रहेंगे. राहुल गांधी ने भी कल यही कहा था’. इस दौरान FCRA बिल पर उन्होंने कहा, ‘हमने अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है. हम इसका जोरदार विरोध करेंगे. जब सदन ठीक से काम नहीं कर रहा हो, तो सरकार इस तरह के बिल को जबरदस्ती पास नहीं करवा सकती. वे इतना महत्वपूर्ण बिल पास नहीं कर सकते, जिसका असर लाखों लोगों, NGO और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ने वाला है. हम उन्हें इसे पास नहीं करने देंगे’.

कांग्रेस का स्थगन प्रस्ताव, छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर बयान देने की मांग

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने शुक्रवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्राओं के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और इस पूरे मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में विस्तृत बयान दें. उन्होंने अपने नोटिस में कहा कि प्रदर्शन को हटाने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस, वाटर कैनन और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं. उन्होंने पूछा कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया, क्या यह कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप थी तथा कितने छात्र घायल, हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए. कांग्रेस सांसद ने मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच कराने, छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने और सरकार से छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि जांच में अत्यधिक बल प्रयोग की पुष्टि होती है तो प्रधानमंत्री को संसद में छात्रों से माफी मांगनी चाहिए. वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव देकर बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल-बदल पर रोक लगाने के लिए अधिक कड़े दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा कराने की मांग की.

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