चक्रधरपुर में जनता की जीत: SDO ने रेलवे का गेट बंद करने का आदेश किया रद्द

Chakradharpur: रेल मंडल मुख्यालय चक्रधरपुर में रेलवे और आम जनता के बीच लंबे समय से चल रहे ‘सड़क विवाद’ पर प्रशासन ने...

Chakradharpur: रेल मंडल मुख्यालय चक्रधरपुर में रेलवे और आम जनता के बीच लंबे समय से चल रहे ‘सड़क विवाद’ पर प्रशासन ने जनहित में बड़ा फैसला सुनाया है. चक्रधरपुर की एसडीओ श्रुति राज लक्ष्मी ने डीआरएम तरुण हुरिया के उस आदेश को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसके तहत रेल क्षेत्र की चार प्रमुख सड़कों पर गेट लगाकर रात में बंद किया जा रहा था.

दशकों पुराने रास्ते बंद करना ‘कानूनन अपराध’
एसडीओ कार्यालय में आयोजित बैठक में रेलवे अधिकारियों और ‘जनता रेल आंदोलन’ के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एसडीओ ने स्पष्ट कहा कि दशकों से आम जनता द्वारा उपयोग किए जा रहे रास्तों को जबरन बंद करना कानूनन अपराध है. उन्होंने कहा कि सड़कों पर गेट लगाकर आवाजाही रोकना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दंडनीय है.

DRM बैठक से रहे नदारद, अधिकारी पहुंचे देर से
इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए डीआरएम तरुण हुरिया को तलब किया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए. उनकी जगह इंजीनियरिंग विभाग के राजीव कुमार और आरपीएफ थाना प्रभारी कमलेश सोरेन बैठक में शामिल हुए. रेल अधिकारियों के निर्धारित समय से करीब 45 मिनट देरी से पहुंचने पर प्रशासनिक स्तर पर नाराजगी भी देखी गई. करीब एक घंटे चली बैठक में रेलवे के तर्क जनता की जरूरतों के सामने कमजोर साबित हुए.

24 घंटे खुले रहेंगे गेट, दो दिन का अल्टीमेटम
एसडीओ ने रेलवे को दो दिनों के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश देते हुए कहा कि चारों सड़कों पर लगाए गए गेट 24 घंटे खुले रहेंगे. स्टेशन, रेलवे अस्पताल और अन्य आवश्यक सेवाओं तक जाने वाले लोगों को किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए. आदेश का पालन नहीं करने पर रेलवे अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

‘जनता रेल आंदोलन’ की पहली बड़ी जीत
इस फैसले के बाद पूरे चक्रधरपुर में खुशी का माहौल है. ‘जनता रेल आंदोलन’ के पदाधिकारियों रामलाल मुंडा, विजय सिंह सुम्बई और बैरम खान ने इसे अपनी पहली बड़ी जीत बताया है. उन्होंने कहा कि गेट खुलवाना केवल शुरुआत है, अब अगला मुद्दा ट्रेनों की लेटलतीफी रहेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक चक्रधरपुर रेल मंडल में यात्री ट्रेनें समय पर नहीं चलेंगी, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा.

जनहित सर्वोपरि: प्रशासन का स्पष्ट संदेश
इस फैसले ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक व्यवस्था में जनहित सर्वोपरि है और किसी भी विभाग की मनमानी को कानून के दायरे में चुनौती दी जा सकती है.

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