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हजारीबाग में फिर भड़का खास महाल भूमि विवाद: अतिक्रमणमुक्त सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश के आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल

Hazaribagh: शहर में खास महाल की बहुमूल्य सरकारी जमीन को लेकर एक बार फिर विवाद गहराने लगा है. कैंटोनमेंट मौजा स्थित करीब...

Hazaribagh: शहर में खास महाल की बहुमूल्य सरकारी जमीन को लेकर एक बार फिर विवाद गहराने लगा है. कैंटोनमेंट मौजा स्थित करीब 50 डिसमिल जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश की चर्चाओं ने प्रशासनिक महकमे के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है. स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों के अनुसार उक्त भूमि पर मजदूरों की आवाजाही बढ़ी है तथा घेराबंदी और निर्माण संबंधी तैयारियों की गतिविधियां देखी जा रही हैं. इससे आशंका जताई जा रही है कि जिस जमीन को वर्ष 2023 में प्रशासन ने अतिक्रमणमुक्त कराया था, उस पर फिर से कब्जा जमाने की कोशिश की जा रही है.

2023 में बना था बड़ा विवाद

यह वही जमीन है जिसे लेकर वर्ष 2023 में हजारीबाग की राजनीति और प्रशासन दोनों में भारी हलचल मची थी. खास महाल राजस्व कर्मचारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की थी. उस समय की जांच में कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद और पूर्व विधायक योगेंद्र साव का नाम सामने आने का दावा किया गया था. जांच रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन ने निर्माण कार्य रोकने, घेराबंदी हटाने और भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने का आदेश जारी किया था. प्रशासन की कार्रवाई के दौरान उक्त जमीन पर की गई घेराबंदी को तोड़ा गया था और सरकारी भूमि को कब्जे से मुक्त कराया गया था.

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प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी नहीं थमा विवाद

नवंबर 2023 में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कथित अवैध घेराबंदी हटाई गई थी. इसके बाद सदर अंचल कार्यालय की ओर से संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन भी दिया गया था. हालांकि उस समय एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब पहले आवेदन में नामजद आरोप लगाए जाने के बाद अगले ही दिन दूसरा आवेदन देकर मामला अज्ञात लोगों पर केंद्रित कर दिया गया. इस बदलाव को लेकर राजनीतिक दबाव और प्रभावशाली हस्तक्षेप के आरोप भी लगे थे. विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने तब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

फिर क्यों लौट आया वही विवाद?

करीब सात महीने बाद एक बार फिर वही भूमि चर्चा के केंद्र में है. स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रीय चर्चाओं के अनुसार जून 2026 में जमीन पर दोबारा गतिविधियां तेज होती दिखाई दी हैं. मजदूरों की मौजूदगी, सीमांकन जैसी तैयारियों और संभावित घेराबंदी की खबरों ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि जिला प्रशासन ने पूर्व में कार्रवाई कर भूमि को अतिक्रमणमुक्त घोषित कर दिया था, तो फिर उसी जमीन पर दोबारा विवाद की स्थिति कैसे पैदा हो रही है? क्या सरकारी जमीनों की निगरानी व्यवस्था कमजोर है, या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण अतिक्रमण की कोशिशें बार-बार दोहराई जा रही हैं?

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प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें

पूरे मामले में अब लोगों की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. यदि जमीन वास्तव में खास महाल की सरकारी भूमि है तो उसकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है. वहीं यदि किसी पक्ष के पास वैध दस्तावेज हैं तो उनकी भी सार्वजनिक जांच आवश्यक मानी जा रही है. शहर में चर्चा का विषय यह बन गया है कि आखिर इस बहुमूल्य भूमि पर वास्तविक अधिकार किसका है-सरकार का, कानून का या फिर रसूखदार दावेदारों का? आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख इस विवाद की दिशा और परिणाम तय करेगा.

जनता पूछ रही है जवाब: छोटे लोगों पर सख्ती, बड़े कब्जाधारियों पर नरमी क्यों?

इन दिनों हजारीबाग में खास महाल भूमि का व्यापक सर्वे अभियान चलाया जा रहा है. प्रशासन द्वारा 1 डिसमिल, 2 डिसमिल और छोटी-छोटी जमीन रखने वाले लोगों से कागजात, रसीद, लीज और अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. इस प्रक्रिया के कारण कई परिवार परेशान हैं और वर्षों से बसे लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में खास महाल भूमि की स्थिति स्पष्ट करना चाहता है तो सबसे पहले उन बड़े भूखंडों की जांच होनी चाहिए, जिन पर वर्षों से प्रभावशाली लोगों, नेताओं और रसूखदारों के कब्जे के आरोप लगते रहे हैं. लोगों का यह भी कहना है कि शहर और आसपास मौजूद खाली सरकारी भूखंडों तथा बंजर पड़ी सरकारी जमीनों को अतिक्रमणमुक्त कराने की दिशा में प्राथमिक कार्रवाई होनी चाहिए. जनता का तर्क है कि छोटे भू-धारकों से दस्तावेज मांगने से पहले बड़े और विवादित कब्जों की निष्पक्ष जांच तथा कार्रवाई होगी, तभी प्रशासनिक अभियान की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर जनता का भरोसा मजबूत होगा. फिलहाल यह मामला एक बार फिर प्रशासन, राजनीति और सरकारी भूमि प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

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