धनबाद में नई ट्रेन के साथ सियासी पावर प्ले मेयर और विधायक साइडलाइन, सांसद ने दिखाई हरी झंडी

धनबाद: कोयलांचल की राजनीति में इन दिनों रेल की पटरियों से ज्यादा सियासी हलचल तेज है. सोमवार रात धनबाद रेलवे स्टेशन पर...

धनबाद: कोयलांचल की राजनीति में इन दिनों रेल की पटरियों से ज्यादा सियासी हलचल तेज है. सोमवार रात धनबाद रेलवे स्टेशन पर धनबाद-एलटीटी (मुंबई) साप्ताहिक एक्सप्रेस के शुभारंभ के दौरान जो कुछ भी घटा वह आश्चर्यजनक था. ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के इस सरकारी कार्यक्रम ने देखते ही देखते शक्ति प्रदर्शन का रूप ले लिया. सांसद ढुलू महतो भारी लाव-लश्कर के साथ प्लेटफॉर्म संख्या आठ पर पहुंचे. उन्होंने न केवल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, बल्कि रवाना होने से पहले इंजन पर सवार होकर चालकों का अभिनंदन भी किया. ट्रेन के प्रति उनकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे खुद उसी ट्रेन में सवार होकर धनबाद से कतरास तक गए, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया.

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बैनर से नाम गायब,अपनों के बीच बढ़ती रार

कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना आयोजन स्थल पर लगा बैनर. बताया जा रहा है कि पहले जो बैनर लगा था, उसमें सांसद के साथ-साथ मेयर संजीव सिंह, धनबाद विधायक राज सिन्हा और झरिया विधायक रागिनी सिंह के नाम भी शामिल थे. लेकिन सांसद के पहुंचने से पहले ही बैनर बदल दिया गया और नए बैनर में केवल सांसद और स्थानीय विधायक का ही नाम रखा गया. धनबाद के विधायक राज सिन्हा इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से नदारद रहे. सूत्रों की मानें तो सांसद और विधायक के बीच कड़वाहट इस कदर बढ़ गई है कि सरकारी कार्यक्रमों में भी दूरियां स्पष्ट झलक रही हैं.

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मेयर संजीव सिंह और रागिनी सिंह

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मेयर संजीव सिंह और सांसद ढुलू महतो के बीच पुरानी अदावत है. मेयर चुनाव के दौरान हुई तीखी बयानबाजी का असर अब तक बना हुआ है. चर्चा है कि रेलवे प्रबंधन ने पहले मेयर और उनकी पत्नी को आमंत्रित किया था, लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव के चलते आमंत्रण रद्द कर दिया गया.

मुंबई का सफर हुआ आसान

राजनीतिक गहमागहमी के बीच धनबाद और आसपास के यात्रियों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है. यह ट्रेन पहले स्पेशल के रूप में चलती थी, जिसे अब नियमित कर दिया गया है. चूंकि रेलवे केंद्र सरकार के अधीन है और केंद्र में भाजपा की सत्ता है, ऐसे में स्थानीय रेल मंडल प्रबंधन का झुकाव सांसद की ओर होना स्वाभाविक माना जा रहा है। विरोधियों का मानना है कि रेलवे के कार्यक्रमों का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को नीचा दिखाने और अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए किया जा रहा है.

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