झारखंड में विकास पर ग्रीन मुहर: 155 प्रोजेक्ट्स को मिली पर्यावरण स्वीकृति, कई अब भी रेड जोन में

Ranchi: झारखंड में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जद्दोजहद जारी है. राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया)...

Ranchi: झारखंड में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जद्दोजहद जारी है. राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) और केंद्रीय मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 155 बड़े प्रोजेक्ट्स को जहां ग्रीन सिग्नल मिला है, वहीं कुछ को कड़े नियमों के चलते अभी इंतजार करना पड़ रहा है. राज्य में बुनियादी ढांचे और खनन क्षेत्र को गति देने के लिए इन प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण स्वीकृति दी गई है, लेकिन नियमों की अनदेखी करने वाले कई प्रोजेक्ट्स पर अब भी ब्रेक लगा हुआ है.

प्रमुख प्रोजेक्ट्स जिन्हें मिली हरी झंडी

• हंसबारी स्टोन माइन (गिरिडीह): पत्थर खनन के लिए हाल ही में (जनवरी 2026) मंजूरी दी गई.

• नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (सरायकेला-खरसावां): स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के लिए पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) प्रदान की गई.

• मेसर्स लाल स्टील प्राइवेट लिमिटेड (गिरिडीह): औद्योगिक विस्तार के लिए पर्यावरण स्वीकृति मिली.

• धोरी सीसीएल प्रोजेक्ट (बोकारो): कोल इंडिया की इस परियोजना के संशोधन को पर्यावरणीय स्वीकृति दी गई.

• कुजाम बॉक्साइट माइंस (हिंडाल्को, गुमला): लंबे समय से लंबित इस प्रोजेक्ट को नियमों के अनुपालन के बाद हरी झंडी मिली.

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वे प्रमुख प्रोजेक्ट्स जो अधर में

• बालू घाट: झारखंड के 389 बालू घाटों में से केवल 21 के करीब ही वर्तमान में पूर्ण स्वीकृति के साथ संचालित हो पा रहे हैं. गलत कोऑर्डिनेट्स और माइनिंग प्लान में त्रुटियों के कारण दर्जनों आवेदन लंबित हैं.

• सेरांगदाग बॉक्साइट खनन (हिंडाल्को): अतिरिक्त तकनीकी जानकारी मांगे जाने के कारण यह प्रक्रियाधीन है.

• लौह अयस्क खदानें (पश्चिमी सिंहभूम): एलिफेंट कॉरिडोर और वन क्षेत्र के करीब होने के कारण कई निजी खदानों की स्वीकृति पर रोक लगी है.

क्या हैं चुनौतियां

• सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उन प्रोजेक्ट्स को एक्स-पोस्ट फैक्टो (काम शुरू होने के बाद की मंजूरी) मिलना मुश्किल हो गया है, जिन्होंने बिना अनुमति के काम शुरू कर दिया था.

• कैग की रिपोर्ट: रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में लघु खनिजों के प्रबंधन में भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिससे पर्यावरण स्वीकृति जारी करने की प्रक्रिया और कड़ी कर दी गई है.

• डिजिटल पारदर्शिता: अब परिवेश 2.0 पोर्टल के माध्यम से झारखंड के हर छोटे-बड़े प्रोजेक्ट की ट्रैकिंग लाइव की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है.

क्या है फैक्ट फाइल

• पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त 155 प्रोजेक्ट, जिनमें पत्थर खनन, बालू घाट, सौर ऊर्जा और अस्पताल शामिल हैं.

• प्रक्रियाधीन या अस्वीकृत 85 प्रोजेक्ट हैं, जिनमें कोयला खनन विस्तार, भारी उद्योग और अवैध खनन क्षेत्र शामिल हैं.

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