हजारीबाग : विनोबा भावे विश्वविद्यालय में अनुशासनहीनता के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुलपति सचिवालय में कार्यरत सहायक जयप्रकाश सिंह की सेवा को उनके पैतृक प्रबंधन विभाग में तत्काल प्रभाव से वापस कर दिया है. कुलसचिव डॉ. प्रणिता द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उनसे मांगा गया स्पष्टीकरण विरोधाभासी, अस्पष्ट और असंतोषजनक पाया गया. कुलपति कक्ष खोलने को लेकर दिए गए मौखिक और लिखित बयान में अंतर सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया.

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प्रभारी कुलपति ने जताई आपत्ति, बयान को माना अपमानजनक
प्रभारी कुलपति डॉ. रेणु बोस ने जयप्रकाश सिंह के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए इसे संस्थान की गरिमा के विरुद्ध बताया. लिखित स्पष्टीकरण में सुरक्षा और दस्तावेजों की रक्षा का हवाला दिया गया, जिसे प्रशासन ने गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक माना. प्रशासन का कहना है कि इस तरह का बयान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है. साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि संबंधित कर्मी ने अपने स्तर पर निर्णय लिया, जिसके लिए वह अधिकृत नहीं थे.
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संविदा नियमों का उल्लंघन, निर्णय पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
जांच में यह भी सामने आया कि जयप्रकाश सिंह एक संविदा कर्मी हैं और उनकी नियुक्ति जिस स्थान के लिए हुई थी, उससे अलग कुलपति सचिवालय में कार्य करना नियमों के विरुद्ध है. इस संबंध में राजभवन से आवश्यक अनुमति भी नहीं ली गई थी. छुट्टी आवेदन को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण भी संतोषजनक नहीं पाया गया. प्रशासन के इस फैसले का विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और शोधार्थियों ने दबी जुबान से समर्थन किया है, हालांकि कुछ लोगों में इस कार्रवाई को लेकर असंतोष और विरोध की संभावना भी जताई जा रही है.
