Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट में आबकारी नीति से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा खुद को केस से अलग करने से इनकार करने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है.
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से दायर याचिका को कोर्ट ने सोमवार (20 अप्रैल) को खारिज कर दिया. खास बात यह रही कि इस मामले में केजरीवाल ने अदालत में खुद अपनी दलीलें पेश की थीं, जिससे यह सुनवाई और भी चर्चा का विषय बन गई.
संजय राउत ने न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल
इस फैसले के बाद शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. मंगलवार (21 अप्रैल) को मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए.
राउत ने कहा कि अगर किसी पक्ष को अदालत पर भरोसा नहीं रह जाता और उसके पीछे ठोस कारण मौजूद हैं, तो ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्याय व्यवस्था पर विचारधारा का प्रभाव पड़ता दिख रहा है, जो चिंता का विषय है.
महाराष्ट्र BJP पर भी साधा निशाना
इसी दौरान संजय राउत ने महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर भी भाजपा पर हमला बोला. उन्होंने राज्य में बढ़ते ड्रग्स मामलों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और सतारा जैसे शहरों में लगातार ड्रग्स की बरामदगी हो रही है. राउत ने आरोप लगाया कि इन गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा अन्य राजनीतिक एजेंडे को हवा दे रही है.
महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर उठे सवाल
राउत ने महिला आरक्षण को लेकर भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में यह विधेयक पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है. ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रदर्शन का औचित्य क्या है, इस पर उन्होंने सवाल खड़े किए. साथ ही उन्होंने डिलिमिटेशन से जुड़े मुद्दे को लेकर भी भाजपा की मंशा पर संदेह जताया.
खुली बहस की चुनौती
बातचीत के अंत में राउत ने खुली बहस की चुनौती भी दी. उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री पहले ही ओपन डिबेट के लिए तैयार हैं और भाजपा को भी इसी स्तर का प्रतिनिधि सामने लाना चाहिए. राउत ने यहां तक कहा कि यदि जरूरत पड़े तो प्रधानमंत्री को भी इस बहस में शामिल किया जाए, ताकि जनता के सामने सभी मुद्दों पर स्पष्ट चर्चा हो सके.
