Ranchi: गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने अपने सफल 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई दिल्ली में आयोजित समारोह में अभियान की उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया.
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने में सफल रहा अभियान
समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल मुख्य रूप से शामिल हुए. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि वर्ष 2016 में शुरू किया गया यह अभियान देश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने में सफल रहा है. उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी.

कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्यकर्मियों के सतत प्रयासों से भारत ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. अभियान के माध्यम से लाखों गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह और सुरक्षित प्रसव सेवाओं का लाभ मिला है. इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अभियान निदेशक आराधना पटनायक, डाक विभाग के चीफ पीएमजी सहित स्वास्थ्य मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.
झारखंड से ऑनलाइन जुड़े शशि प्रकाश झा
राष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा भी नामकुम स्थित एनएचएम राज्य मुख्यालय से ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए. कार्यक्रम के बाद उन्होंने राज्य में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए. उन्होंने मातृत्व कोषांग की राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. पुष्पा को निर्देश दिया कि सभी जिलों में मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.
सरकारी और निजी अस्पतालों में लगेंगे बड़े होर्डिंग
शशि प्रकाश झा ने निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता मिल सके, इसके लिए सभी जिलों में मातृत्व स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों और प्रभारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएं. उन्होंने यह भी कहा कि गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सभी सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और स्वास्थ्य सुविधाओं की सूची तैयार कर बड़े-बड़े होर्डिंग्स और सूचना बोर्ड राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ निजी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में लगाए जाएं, ताकि लाभुकों को योजनाओं की जानकारी आसानी से मिल सके.
