Seraikela : झारखंड राज्य के सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. फसलों की बर्बादी और जान-माल के नुकसान से किसान बेहाल हैं. लेकिन आज तक यह निर्धारित नहीं हो पाया है कि ये हाथियों के झुंड पश्चिम बंगाल, ओडिशा राज्य अथवा दलमा वन्यजीव अभयारण्य से विचरण करते हुए आते हैं.
सवालों के घेरे में वन विभाग
स्थानीय लोगों का कहना है कि दलमा सेंचुरी से हर साल दर्जनों हाथी निकलकर गांवों की ओर रुख कर लेते हैं. खेतों में लगी धान, मक्का और सब्जी, ओर पके रबी धान की फसल को रौंद देते हैं. कई बार घर भी तोड़ देते हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर सेंचुरी से हाथियों के पलायन पर रोक क्यों नहीं लगाई गई? वन विभाग ने हाथियों को सेंचुरी की सीमा में रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाए?
तीनों राज्यों की सीमा से सटे इलाके प्रभावित
सरायकेला-खरसावां जिला पश्चिम बंगाल और ओडिशा की सीमा से सटा है. दलमा सेंचुरी भी यहीं स्थित है. ऐसे में हाथियों का झुंड तीनों जगहों से आ सकता है. लेकिन वन विभाग के पास सटीक डेटा नहीं है कि कौन सा झुंड कहां से आया. रेडियो कॉलरिंग और ट्रैकिंग की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है.

किसानों की मांग: स्थायी समाधान हो
चांडिल, नीमडीह, ईचागढ़ और कुचाई प्रखंड के किसान लगातार हाथियों के आतंक से परेशान हैं. ग्रामीणों ने मांग की है कि दलमा सेंचुरी की फेंसिंग मजबूत की जाए, सोलर फेंसिंग लगाई जाए और हाथी कॉरिडोर को अतिक्रमण मुक्त किया जाए. साथ ही फसल नुकसान का त्वरित मुआवजा दिया जाए.
वन विभाग का पक्ष
इस संबंध में वन प्रमंडल पदाधिकारी का कहना है कि हाथियों का प्राकृतिक प्रवास मार्ग है. भोजन-पानी की तलाश में झुंड विचरण करते हैं. दलमा में हाथियों की संख्या बढ़ी है, इसलिए वे बाहर निकल रहे हैं. रोकथाम के लिए गश्ती दल बढ़ाए गए हैं और क्विक रिस्पांस टीम गठित की गई है. फिलहाल ग्रामीण दहशत में रात गुजार रहे हैं और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.
चाकुलिया में हाथियों का बढ़ता आतंक, आबादी के बीच पहुंच रहे झुंड
वन विभाग के उपाय बेअसर,गोशाला परिसर में डटे 4 हाथी, माटिहाना सड़क पर आवाजाही से राहगीरों में दहशत . चाकुलिया (पूर्वी सिंहभूम) पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया वन क्षेत्र में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता और दहशत बढ़ा दी है. जंगलों में भोजन और पानी की कमी के चलते हाथियों के झुंड लगातार आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे गांवों और आसपास के क्षेत्रों में भय का माहौल बना हुआ है.
15-20 हाथी डेरा डाले हुए
ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई दिनों से हाथियों के झुंड गांवों और रिहायशी क्षेत्रों के आसपास मंडरा रहे हैं. लोगों को हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका सता रही है. जानकारी के मुताबिक राजाबासा-मोरबेडा जंगल में पिछले तीन-चार दिनों से दो अलग-अलग दलों में करीब 15 से 20 हाथी डेरा जमाए हुए हैं. अब ये झुंड जंगल से निकलकर आबादी की ओर बढ़ने लगे हैं. चाकुलिया के नया बाजार स्थित कोलकाता पिंजरापोल सोसाइटी गोशाला परिसर में चार जंगली हाथी कई दिनों से डटे हुए हैं. हाथियों की मौजूदगी से गोशाला कर्मियों और स्थानीय लोगों में भय व्याप्त है. कर्मचारियों को रोजमर्रा के कार्य करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. हाथियों ने परिसर में लगे आम, कटहल और काजू समेत कई पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे गोशाला प्रबंधन को आर्थिक क्षति हुई है. वहीं, गोशाला के आसपास स्थित साबुन फैक्ट्री और राइस मिल के कर्मचारियों में भी डर का माहौल है. शाम होते ही लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं.

सड़कों पर भी दिख रहे हाथी, राहगीरों में दहशत
माटिहाना मुख्य सड़क पर चौठिया गांव के पास भी हाथियों का झुंड अक्सर सड़क पार करता देखा जा रहा है. अचानक सड़क पर हाथियों के आने से राहगीरों और वाहन चालकों में अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है. कई बार लोगों को सुरक्षा के मद्देनजर अपना रास्ता बदलना पड़ता है. विशेषकर रात के समय इस मार्ग से गुजरने वाले लोग ज्यादा भयभीत रहते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

वन विभाग के प्रयास नहीं दे रहे परिणाम
हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए वन विभाग द्वारा किए गए अधिकांश प्रयास अब तक कारगर साबित नहीं हुए हैं. हाथियों को भगाने के लिए पटाखे फोड़ने, मशाल जलाने, ढोल बजाने और मधुमक्खी पालन जैसे कई उपाय अपनाए गए, लेकिन इनका अपेक्षित परिणाम नहीं मिला. ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हाथियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी और प्रभावी समाधान नहीं निकाला गया है.
सुरक्षा बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से आबादी वाले क्षेत्रों से हाथियों को हटाने, निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है. वन क्षेत्र पदाधिकारी ने बताया कि हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. ग्रामीणों से अपील है कि रात में अकेले न निकलें और हाथी दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें.
