RANCHI: झारखंड की राजधानी रांची की सड़कों पर इन दिनों नगर निगम का बुलडोजर गरज रहा है. ‘अतिक्रमण मुक्त शहर’ का नारा बुलंद है, लेकिन इसके पीछे उन सैकड़ों रेहड़ी-पटरी वालों की परेशानियां भी सामने आ रही हैं, जिनकी आजीविका सड़कों पर निर्भर है.
चुनावी वादों पर उठे सवाल, वादे और हकीकत में अंतर
चुनाव के दौरान नेताओं ने वादा किया था कि गरीबों को उजाड़ा नहीं जाएगा और वेंडिंग जोन बनाकर उन्हें स्थायी जगह दी जाएगी. लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कई वादे अधूरे रह गए, जिससे फुटपाथ दुकानदारों में नाराजगी है.
‘सेलेक्टिव कार्रवाई’ के आरोप, गरीबों पर सख्ती का दावा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम की कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित रहती है. बड़े शोरूम और प्रभावशाली लोगों के कथित अतिक्रमण पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती. पीड़ितों का कहना है कि उनके पास न संसाधन हैं और न ही पैरवी, इसलिए उनका सामान जब्त कर लिया जाता है.
वेंडिंग जोन योजना अधूरी, सुविधाओं का अभाव
सरकार द्वारा रांची में वेंडिंग जोन बनाने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है. जहां वेंडिंग जोन बने भी हैं, वहां पानी, बिजली और ग्राहकों की पहुंच जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जिससे दुकानदारों को भारी परेशानी हो रही है.
विकास बनाम आजीविका का सवाल
रांची के सौंदर्यीकरण और जाम से राहत की जरूरत तो है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह विकास गरीबों की आजीविका छीनकर होना चाहिए. लोगों का कहना है कि जब कार्रवाई में भेदभाव दिखता है, तो प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है.
