Ranchi: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (JSDMS) में कथित 55 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की है. उन्होंने मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी या कैग से विशेष ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है.
फर्जी बैंक गारंटी मामले का किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि 8 अगस्त 2024 को तत्कालीन मिशन निदेशक ने छह कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का दोषी मानते हुए अगस्त 2026 तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था. हालांकि, 14 अक्टूबर 2024 को वर्तमान मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने कथित लोकहित का हवाला देते हुए इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से बाहर कर दिया. इसके बाद विभाग ने इन्हीं कंपनियों को करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया.
विनय चौबे की गिरफ्तारी के बाद फिर हुई कार्रवाई
पत्र में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2025 में फर्जी बैंक गारंटी मामले में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे की गिरफ्तारी के बाद जल्दबाजी में इन्हीं कंपनियों को दोबारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. बाबूलाल मरांडी ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितता का मामला बताया है.
सरकार से पूछे कई अहम सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से पूछा है कि यदि कंपनियां दोषी थीं, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट से बाहर निकालने का फैसला किसके आदेश और किस नियम के तहत लिया गया. उन्होंने यह भी सवाल किया कि 55 करोड़ रुपये के भुगतान की मंजूरी किस स्तर पर और किस अधिकारी ने दी. उन्होंने यह भी पूछा कि यदि एक विभाग के सचिव पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, तो श्रम विभाग के तत्कालीन और वर्तमान सचिवों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इस पूरे मामले को किसी राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण में अंजाम दिया गया और क्या सरकार अगस्त 2026 में ब्लैकलिस्ट अवधि समाप्त होने के बाद इन कंपनियों को दोबारा काम देने की तैयारी कर रही है.
बाबूलाल मरांडी की प्रमुख मांगें
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि श्रम विभाग के तत्कालीन और वर्तमान सचिव सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए. वर्ष 2023-24 से अब तक JSDMS के सभी निर्णयों का कैग या किसी स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट कराया जाए. उन्होंने जांच प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल पद से हटाने, दागी कंपनियों को दिए गए 55 करोड़ रुपये की वैधानिकता की जांच कर राशि की वसूली करने तथा जांच पूरी होने तक इन कंपनियों को किसी भी नए टेंडर या भुगतान से दूर रखने की भी मांग की है.
एसीबी जांच और राजनीतिक भूमिका की भी मांग
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी उच्च स्तरीय राजनीतिक संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही शैलेंद्र लाल, राजन श्रीवास्तव और विश्वरूप ठाकुर की भूमिका एवं उनकी संपत्तियों की एसीबी से विशेष जांच कराने की भी मांग की गई है.
