Hazaribagh : हजारीबाग जिले में खतियानी जमीन की रजिस्ट्री पिछले लगभग एक माह से प्रभावित है. रजिस्ट्री कार्यालय में ऐसी जमीनों की खरीद-बिक्री लगभग बंद होने से हजारों रैयतों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिससे लोगों के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है.
जरूरत के समय जमीन नहीं बेच पा रहे रैयत
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, इलाज, विवाह, खेती, मकान निर्माण और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लोग अक्सर अपनी जमीन बेचते हैं. लेकिन खतियानी जमीन की रजिस्ट्री बंद होने से ऐसे परिवार आर्थिक संकट में फंस गए हैं. कई लोग पहले ही खरीदार तय कर चुके थे, लेकिन रजिस्ट्री नहीं होने से सौदे अटक गए हैं.

रजिस्ट्री कार्यालय में पसरा सन्नाटा
पहले जहां हजारीबाग रजिस्ट्री कार्यालय में प्रतिदिन करीब 100 रजिस्ट्रियां होती थीं, वहीं वर्तमान में इक्का-दुक्का रजिस्ट्रियां ही हो रही हैं. मंगलवार को भी कार्यालय परिसर में लोगों की संख्या काफी कम दिखाई दी. खरीदार, विक्रेता, दस्तावेज लेखक और अधिवक्ता पूरे दिन स्पष्ट जानकारी का इंतजार करते रहे. जानकारी के अनुसार पहले से सेल डीड के माध्यम से खरीदी गई जमीनों की पुनः खरीद-बिक्री की रजिस्ट्री सीमित रूप से की जा रही है. हालांकि खतियानी जमीन के मामलों में अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग के कारण अधिकांश आवेदन लंबित हैं.

अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग पर उठ रहे सवाल
दस्तावेज लेखकों और रैयतों का कहना है कि रजिस्ट्री के लिए ऐसे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिनकी पहले आवश्यकता नहीं पड़ती थी. उनका आरोप है कि इन दस्तावेजों की मांग का कोई स्पष्ट कानूनी आधार सार्वजनिक नहीं किया गया है. इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल हो गई है. रजिस्ट्री का काम लगभग ठप होने से दस्तावेज लेखक, टाइपिस्ट, मुंशी और रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़े अन्य लोगों की आय भी प्रभावित हुई है. उनका कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले लोग अब मायूस होकर लौट रहे हैं, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ा है.
प्रशासन से पारदर्शिता की मांग
रैयतों की मांग है कि यदि खतियानी जमीन की रजिस्ट्री पर किसी प्रकार का वैधानिक प्रतिबंध लगाया गया है तो उसका लिखित आदेश सार्वजनिक किया जाए. यदि नई व्यवस्था लागू की गई है तो उसके तहत आवश्यक दस्तावेजों की स्पष्ट सूची जारी की जाए, ताकि लोग अनावश्यक परेशानी से बच सकें. जमीन से जुड़े मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता यशदीप प्रजापति का कहना है कि यदि किसी दस्तावेज को स्वीकार नहीं किया जा रहा है तो उसके पीछे स्पष्ट कानूनी प्रावधान होना चाहिए. केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर रजिस्ट्री सीमित करना उचित नहीं माना जा सकता. यदि सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है तो उसका लिखित आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
जिला अवर निबंधक ने क्या कहा
जिला अवर निबंधक प्रेम कुमार के अनुसार जमीन की खरीद-बिक्री पर पूर्ण रोक नहीं लगाई गई है. उन्होंने कहा कि गड़बड़ियों को रोकने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. निर्धारित कागजात उपलब्ध कराने के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. खतियानी जमीन की रजिस्ट्री में आई इस रुकावट ने न केवल आम रैयतों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है, बल्कि रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े पूरे तंत्र पर भी असर डाला है. अब सभी की निगाहें राज्य सरकार, निबंधन विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे जल्द स्थिति स्पष्ट कर सामान्य रजिस्ट्री प्रक्रिया बहाल करें, ताकि लोगों को राहत मिल सके.
Also Read : रांची: भूमि पूजन के साथ चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति ने किया दुर्गा पूजा पंडाल निर्माण कार्य का शुभारंभ

