Tamar/Bundu: विकास और योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच तमाड़, बुंडू, सोनाहातू और ईचागढ़ क्षेत्र को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सालगाडीह केनाल रोड आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है. इस सड़क की खराब स्थिति ने हजारों ग्रामीणों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है. NH-33 से सीधे बोरंदा (पश्चिम बंगाल) को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग अब सड़क कम और दलदल ज्यादा नजर आता है. जगह-जगह बड़े गड्ढे, कीचड़ और टूटे रास्ते लोगों के लिए परेशानी का कारण बन चुके हैं. बारिश के दिनों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से उपेक्षा का शिकार है. चुनाव के समय वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं भुला दी जाती हैं.
गर्भवती महिलाओं और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी
सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को हो रही है. ग्रामीणों के अनुसार कई बार एम्बुलेंस गांव तक पहुंच ही नहीं पाती. मरीजों को खाट या बाइक के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाने के कारण कई बार गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है.

बच्चों की पढ़ाई और किसानों की आजीविका पर असर
इस सड़क से होकर रोज स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बारिश में बच्चे कीचड़ से सने कपड़ों के साथ स्कूल पहुंचते हैं, जबकि कई बच्चे डर और परेशानी के कारण स्कूल जाना छोड़ देते हैं. अभिभावकों का कहना है कि खराब सड़क बच्चों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही है.
किसानों और रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों पर भी इसका असर पड़ रहा है. किसान समय पर अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. वहीं नौकरी और मजदूरी के लिए रोज सफर करने वाले युवाओं को घंटों परेशानी झेलनी पड़ती है.
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “क्या हमारी जरूरत सिर्फ वोट तक सीमित है?” ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली को लेकर कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सालगाडीह केनाल रोड की तत्काल मरम्मत शुरू की जाए, कच्ची और दलदली सड़क को पक्की सड़क में बदला जाए तथा जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
लोगों का कहना है कि यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की जिंदगी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का रास्ता है. ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्य सड़कें दलदल में तब्दील हों और लोग मरीजों को कंधे पर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हों, तो यह व्यवस्था और विकास दोनों पर बड़ा सवाल है. प्रशासन को कागजी योजनाओं से बाहर निकलकर जमीन पर काम करना होगा.
ALSO READ: जमीन विवाद में देर रात फायरिंग, एक घायल
