Seraikela: सिंहभूम कॉलेज, चांडिल के बिरसा मुंडा सभागार में गुरुवार को साहित्य अकादमी द्वारा ‘साहित्यिक मंच’ (Literary Forum) कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम कॉलेज और जुवान ओनोलिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ. इसका विषय था “रघुनाथ टुडू का जीवन और उनके कार्य तथा युवा साहित्य.”

संताली साहित्य के विकास पर दिया गया जोर
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. सुनील मुर्मू ने कहा कि इस तरह के आयोजन क्षेत्रीय भाषाओं और युवा साहित्यकारों को मजबूत मंच प्रदान करते हैं. उन्होंने कॉलेज में संताली साहित्य के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. डॉ. मुर्मू ने कहा कि संताली के भोगला सोरेन जैसे प्रबुद्ध साहित्यकारों को सुन पाना विद्यार्थियों के लिए उपलब्धि है.

कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. रिया शालिनी, सहायक प्राध्यापक, के स्वागत भाषण से हुई. प्रख्यात संताली विद्वान बाबूराम सोरेन ने Keynote Address देते हुए रघुनाथ टुडू के साहित्यिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला. साहित्य अकादमी से पुरस्कृत प्रसिद्ध नाटककार ने युवा रचनाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि समकालीन दौर में अपनी जड़ों और लोक साहित्य को बचाए रखना जरूरी है. उन्होंने रघुनाथ टुडू के गीत, नाटक और संगीत पर चर्चा करते हुए कहा कि रघुनाथ टुडू सिर्फ कवि नहीं, बल्कि महान संताली दार्शनिक भी थे. उन्होंने बताया कि संताली में नाटक की तीन शैलियां प्रचलित हैं–पंडित रघुनाथ मुर्मू शैली, रघुनाथ टुडू शैली और यदुनाथ टुडू शैली. रघुनाथ टुडू की शैली झारखंड और उड़ीसा में अत्यधिक प्रचलित है, इसलिए उनके नाटक आज भी प्रासंगिक हैं.
शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, युवा साहित्यकारों ने सुनाईं कविताएं
इसके बाद घासीराम मुर्मू, जितराई हांसदा, कृष्ण टुडू और जागरण मुर्मू ने विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए. उपस्थित प्रबुद्धजनों ने विषय पर गहन विचार-विमर्श किया. द्वितीय सत्र में युवा साहित्यकारों ने अपनी स्वरचित कविताएं सुनाईं. रवि हेंब्रम, नरेंद्र माझी, लखन माझी, फनीभूषण टुडू, अनिमा टुडू, हिमानी मुर्मू और पायल मुर्मू की कविताओं ने साहित्य प्रेमियों का मन मोह लिया. कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षक, संताली भाषा के शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन बाबूराम सोरेन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पास्कल बैक और डॉ. डुमरेंद्र राजन ने संयुक्त रूप से किया.


