Saraikela: जिले के कुकड़ू प्रखंड में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. ग्राम शीशी से निर्माणाधीन अल्पसंख्यक विद्यालय तक डेढ़ किलोमीटर लंबी बिजली लाइन पोल की जगह पेड़ों के सहारे टांग दी गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग और संवेदक की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है. कई जगह तार इतने नीचे हैं कि बच्चे भी चपेट में आ सकते हैं. मीटर से पहले ही कनेक्शन जोड़कर बिजली इस्तेमाल करने का भी आरोप है.
कई जगहों पर तार क्षतिग्रस्त और लीकेज की स्थिति
कुकड़ू प्रखंड के ग्राम शीशी से निर्माणाधीन अल्पसंख्यक विद्यालय तक बिछाई गई विद्युत लाइन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन के लिए एक भी विद्युत पोल नहीं लगाया गया. सड़क किनारे खड़े पेड़ों पर ही तार टांग दिए गए हैं. कई जगहों पर तार क्षतिग्रस्त हैं और लीकेज की स्थिति है. तार इतनी कम ऊंचाई पर लटके हैं, कि छोटे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं. बिजली के तार निजी खेतों के ऊपर से भी गुजारे गए हैं.

शिकायत करने पर नहीं होती सुनवाई
ग्रामीणों का कहना है, कि “पोल लगाने के बजाय पेड़ों पर तार बांध दिया है. तार टूटा हुआ है, करंट उतर रहा है. बच्चे खेलते हैं, कभी भी हादसा हो सकता है. खेत के ऊपर से तार ले गए. शिकायत करो तो कोई सुनता नहीं. लगता है विभाग और ठेकेदार मिले हुए हैं.” ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत अधिनियम 2003 और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण CEA के सुरक्षा विनियमों के तहत लाइन का निर्माण पोल के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन नियमों की अनदेखी की गई. इतना ही नहीं, विद्यालय निर्माण के दौरान भारी वाहनों से गांव की कच्ची सड़क पूरी तरह टूट गई है. पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. सबसे गंभीर आरोप यह है कि मीटर तक बिजली पहुंचने से पहले दूसरी लाइन से कनेक्शन जोड़कर बिजली इस्तेमाल की जा रही है. अगर यह सही है तो यह सीधे बिजली चोरी का मामला है.
सुरक्षा मानकों के अनुरूप तुरंत लाइन दुरुस्त करने की मांग
ग्रामीणों का कहना है, कि मीटर लगा ही नहीं और लाइट जला रहे हैं. सीधे तार जोड़ दिया गया है. कई बार बोलने पर भी न ठेकेदार सुनते हैं और न बिजली वाले. बिना मिलीभगत के ये काम हो ही नहीं सकता. इसकी जांच होनी चाहिए. ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और सुरक्षा मानकों के अनुरूप तुरंत लाइन दुरुस्त करने की मांग की है. फिलहाल संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
पेड़ों पर लटके बिजली के तार किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं. नियमों को ताक पर रखकर बिछाई गई यह लाइन बच्चों और किसानों के लिए खतरा बन गई है.अब देखना होगा कि विभाग कब नींद से जागता है और कब तक ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर रहेंगे.


