Giridih: उसरी नदी के पानी को पाइपलाइन के जरिए बालमुकुंद फैक्ट्री तक ले जाने की प्रस्तावित योजना के विरोध में रविवार को सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए. गंगापुर से चतरो मोड़ तक ग्रामीणों ने विशाल पैदल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया. इस दौरान लोगों ने उसरी फॉल और नदी को बचाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की.यह पैदल मार्च ‘उसरी बचाओ अभियान’ और ‘एक आवाज प्रदूषण के खिलाफ’ के बैनर तले भाकपा (माले), असंगठित मजदूर मोर्चा, झारखंड मजदूर संगठन (झामस) और अखिल भारतीय किसान महासभा के संयुक्त तत्वावधान में निकाला गया. इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और आसपास के गांवों के लोग शामिल हुए. मार्च के दौरान ‘उसरी फॉल बचाओ’, ‘प्रकृति बचाओ’, ‘बालमुकुंद फैक्ट्री होश में आओ’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. गंगापुर से शुरू हुआ यह मार्च आगे बढ़ते-बढ़ते जनआंदोलन का रूप लेता गया.
उसरी नदी और फॉल के अस्तित्व पर खतरे का आरोप
मार्च का नेतृत्व कर रहे भाकपा (माले) नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि उसरी नदी और उसरी फॉल गिरिडीह की प्राकृतिक पहचान हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि फॉल से कुछ दूरी पर बालमुकुंद फैक्ट्री द्वारा सड़क किनारे पाइपलाइन बिछाकर नदी का पानी फैक्ट्री तक ले जाने की तैयारी की जा रही है, जिससे नदी और फॉल के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है.उन्होंने कहा कि एक ओर प्रशासन और पर्यटन विभाग उसरी फॉल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उद्योग के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.राजेश सिन्हा ने चेतावनी दी कि यदि पाइपलाइन योजना पर रोक नहीं लगाई गई तो संबंधित विभागों के खिलाफ व्यापक आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि उसरी फॉल को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा.
ग्रामीणों ने लगाए वादाखिलाफी के आरोप
असंगठित मजदूर मोर्चा के नेता कन्हाई पांडेय ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से ग्रामीणों के हित में कई वादे किए गए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया.उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सहयोग तथा डीप बोरिंग जैसे वादे किए गए थे, लेकिन ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि दबाव बनाकर पाइपलाइन बिछाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं.
प्रशासन ने किया था स्थल निरीक्षण
ग्रामीणों के अनुसार, आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग, जिला प्रशासन और डीवीसी के प्रतिनिधियों ने मौके का निरीक्षण किया था. ग्रामीणों का दावा है कि पाइपलाइन कार्य को फिलहाल रोक दिया गया है. हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस योजना का विरोध किया है. उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि पाइपलाइन निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने मामले को गिरिडीह उपायुक्त, वन विभाग, डीवीसी अधिकारियों, पर्यटन विभाग, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने की बात कही.प्रदर्शन में गंगापुर और आसपास के गांवों के सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल हुए. आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उसरी नदी और उसरी फॉल की सुरक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा.
