Ranchi/Jamshedpur: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय एक बार फिर अपने अलग अंदाज और जनसरोकारों को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने टाटानगर से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की लगातार हो रही लेटलतीफी के मुद्दे को जिस मजबूती से उठाया, उससे रेलवे प्रशासन को बड़े फैसले लेने पर मजबूर कर दिया. लंबे समय से यात्रियों की शिकायत थी कि मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने के कारण यात्री ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रही थी. 27 मई को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन के साथ हुई बैठक में सरयू राय ने इस समस्या को बेहद आक्रामक ढंग से रखा. उन्होंने साफ कहा कि यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को आगे बढ़ाना आम यात्रियों के साथ अन्याय है. बैठक के दौरान ही रेलवे महाप्रबंधक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अब किसी भी परिस्थिति में मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों पर प्राथमिकता नहीं दी जाएगी.
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ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था पर नजर रखेंगे विशेष अधिकारी
इतना ही नहीं, रेलवे प्रशासन ने एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति का भी निर्णय लिया, जो ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था पर नजर रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि यात्री ट्रेनों के साथ भेदभाव न हो. यह अधिकारी प्रतिदिन रेल यात्री संघर्ष समिति और मीडिया को स्थिति की जानकारी भी देगा. दरअसल, इस पूरे आंदोलन की शुरुआत 7 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब रेलवे स्टेशन परिसर में ट्रेनों की लेटलतीफी के खिलाफ धरना दिया गया. उस समय शायद रेलवे प्रशासन ने इस आंदोलन की गंभीरता को नहीं समझा था. लेकिन सरयू राय ने उसी दिन संकेत दे दिया था कि यह सिर्फ एक दिन का विरोध नहीं बल्कि बड़ा जनआंदोलन बनने वाला है. बाद में “रेल यात्री संघर्ष समिति” का गठन किया गया और शिव शंकर सिंह को इसका संयोजक बनाया गया. इसके बाद आंदोलन लगातार विस्तार लेता गया. साकची, बर्मामाइंस और मानगो में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया. फिर आंदोलन जमशेदपुर से निकलकर घाटशिला तक पहुंचा. घाटशिला में लोगों का जबरदस्त समर्थन देखने को मिला. यात्रियों ने खुलकर अपनी परेशानियां साझा कीं, इससे आंदोलन और तेज हो गया.
आंदोलन से रेल प्रशासन पर बढ़ा दबाव
बताया जाता है कि आंदोलन के बढ़ते प्रभाव और जनता के समर्थन को देखते हुए रेलवे प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता गया. रेल यात्री संघर्ष समिति ने हर मंच से चेतावनी दी थी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र हो सकता है. रेलवे की छवि पर भी इसका असर पड़ने लगा था. आंदोलन के दौरान 7 अप्रैल का वह दृश्य भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा, जब भीषण गर्मी में सरयू राय लगातार तीन घंटे तक धरने पर बैठे रहे. रेलवे प्रशासन ने पहले से तय धरनास्थल पर अनुमति नहीं दी थी और वहां भारी बैरिकेडिंग कर दी गई थी. बावजूद इसके आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे और पार्किंग क्षेत्र के पास धरना आयोजित किया गया. तेज धूप और गर्मी के बीच 76 वर्षीय सरयू राय अपने साथियों के साथ बिना उठे लगातार बैठे रहे. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों और रेलवे कर्मियों को भी प्रभावित कर गया.
आंदोलन का जमीन पर दिख रहा असर
अब आंदोलन का असर जमीन पर भी दिखने लगा है. जानकारी के अनुसार, दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के कमर्शियल इंस्पेक्टर अबीर मिश्रा को टाटानगर में ट्रेनों की लेटलतीफी पर निगरानी रखने के लिए पूर्णकालिक पीआरआई (पब्लिक रिलेशन इंस्पेक्टर) नियुक्त किया गया है. महज 48 घंटे के भीतर हुई इस नियुक्ति को आंदोलन की बड़ी सफलता माना जा रहा है. सरयू राय ने हालांकि साफ कर दिया है कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है. रेल यात्री संघर्ष समिति अगले कुछ दिनों तक रेलवे के फैसलों के अनुपालन पर नजर रखेगी. यदि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो आगे और बड़ा आंदोलन भी किया जा सकता है.
