Ranchi: झारखंड में जून के महीने में बादलों ने ऐसी बेरुखी दिखाई है कि पूरे सूबे में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है. मानसून के दस्तक देने के पारंपरिक समय के बावजूद, सूबे के आसमान में बादलों की आवाजाही तो है, लेकिन वे बरस नहीं रहे हैं. 1 जून से 23 जून तक के आधिकारिक आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि झारखंड में इस बार मानसून की शुरुआत बेहद निराशाजनक और चिंताजनक रही है. पूरे राज्य में सामान्य से 60% कम बारिश दर्ज की गई है, जिसने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं.
60% की भारी गिरावट
यदि पूरे झारखंड की बात करें तो 23 जून तक राज्य में औसतन 122.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षापात महज 49.5 मिमी ही हो सका है. कुल मिलाकर पूरा राज्य 60% की भारी कमी (विचलन) से जूझ रहा है. अगर अगले एक हफ्ते में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ फसलों की बुआई पूरी तरह ठप हो सकती है.

सिर्फ रांची और दुमका में सामान्य राहत
इस भीषण सूखे के बीच राहत की बात सिर्फ इतनी है कि राजधानी रांची और संथाल परगना का दुमका जिला किसी तरह लाज बचाने में कामयाब रहे हैं. रांची में सामान्य (125.7 मिलीमीटर) के मुकाबले 119.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सिर्फ 5% कम है. वहीं दुमका में 130.7 मिमी के मुकाबले 108.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य से 17% कम है.
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कमी झेल रहे सात जिले: हालात सुधरने का इंतजार
राज्य के 7 जिले ऐसे हैं जहां बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है, यानी यहां सामान्य से 20% से 59% तक कम पानी बरसा है. इन जिलों में धनबाद (49% कम), गिरिडीह (49% कम), गुमला (57% कम), जामताड़ा (51% कम), रामगढ़ (41% कम), सिमडेगा (49% कम) शामिल हैं. यहां खेती-किसानी की शुरुआत तो हुई है, लेकिन फसल को जिंदा रखने के लिए दमदार बारिश की सख्त जरूरत है.
15 जिलों में हाहाकार
सबसे डरावनी तस्वीर राज्य के उन 15 जिलों की है जहां बारिश स्कैंटी यानी बेहद कम (60% से 99% तक कम) रही है. गढ़वा में तो स्थिति इतनी बदतर है कि यहां सामान्य 81 मिमी के मुकाबले सिर्फ 1 मिमी बारिश हुई है, जो 99% की गिरावट है. इसी तरह साहिबगंज में 98% की कमी (3.2 मिमी) देखी गई है. इसके अलावा चतरा (93% कम), लोहरदगा, पलामू और सराइकेला-खरसावां (तीनों 84% कम), खूंटी (75% कम), गोड्डा (74% कम), कोडरमा (73% कम), लातेहार (72% कम), पूर्वी सिंहभूम (71% कम), पश्चिमी सिंहभूम (68% कम), देवघर और पाकुड़ (67% कम) तथा बोकारो (62% कम) में हालात बेहद गंभीर हैं.


