जेएन कॉलेज चक्रधरपुर में शिक्षकों का टोटा, विज्ञान संकाय में एक भी शिक्षक नहीं: पवन शंकर पांडेय

Chakradharpur: चक्रधरपुर के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय में शिक्षकों की घोर कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो...

Pawan Shankar Pandey
भाजपा नेता पवन शंकर पांडे

Chakradharpur: चक्रधरपुर के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय में शिक्षकों की घोर कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो गई है. सबसे खराब स्थिति विज्ञान संकाय की है, जहां भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित जैसे मुख्य विषयों में एक भी शिक्षक तैनात नहीं है. इस गंभीर समस्या को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडेय ने महामहिम राज्यपाल (झारखंड) और कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति को मांग पत्र सौंपा है.

​बिना गुरु के कैसे पढ़ेंगे छात्र?

​राज्यपाल को भेजे पत्र में भाजपा नेता पवन शंकर पांडेय ने कहा कि पश्चिम सिंहभूम जिला अंतर्गत अवस्थित चक्रधरपुर के जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय में प्राध्यापकों की भारी कमी है. इस वजह से कॉलेज का पठन-पाठन का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. विज्ञान संकाय में तो स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है. इसके कारण वर्तमान में पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई तो बाधित हो ही रही है, साथ ही कॉलेज के अस्तित्व पर भी सवाल उठने लगे हैं.

घोषित हुए रिजल्ट, पर नामांकन अधर में

पांडेय ने राजभवन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि हाल ही में इंटरमीडिएट (12वीं) का परीक्षा परिणाम प्रकाशित हुआ है. चक्रधरपुर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने विज्ञान संकाय में सफलता पाई है. ये सभी विद्यार्थी आगे की पढ़ाई के लिए इसी एकमात्र अंगीभूत कॉलेज पर निर्भर हैं. लेकिन कॉलेज के विज्ञान संकाय में प्राध्यापक नहीं होने के कारण उत्तीर्ण विद्यार्थियों का आगे नामांकन होना असंभव प्रतीत हो रहा है. यदि ऐसा हुआ, तो क्षेत्र के सैकड़ों होनहार छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे.

​शीघ्र नियुक्ति की मांग, अन्यथा छात्र हित में होगा आंदोलन

पवन शंकर पांडेय ने महामहिम राज्यपाल से इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए उचित कदम उठाने का आग्रह किया है. उन्होंने मांग की है, कि चक्रधरपुर जेएन कॉलेज में शिक्षकों की कमी को अविलंब दूर किया जाए, विशेषकर विज्ञान संकाय के सभी विषयों के लिए शिक्षकों की तुरंत नियुक्ति की जाए, ताकि सुदूर क्षेत्र के गरीब और आदिवासी वर्ग के विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र बर्बाद न हो और वे सुचारू रूप से अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें.

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