Ranchi: झारखंड़ राज्य के गठन के बाद से ही यहां की ब्यूरोक्रेसी विवादों और आरोपों के चक्रव्यूह में फंसी है, कभी जेल की हवा खाने वाले पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती का अध्याय हो, या फिर हाल ही में 14वीं जेपीएसएसी की गड़बड़ियों को लेकर CID की रडार पर आए एक और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्याते. सिर्फ यही नहीं, अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर रह चुके K K खंडेलवाल पर भी जांच की तलवार लटकी.
सजल चक्रवर्ती और एल. खियांग्याते
झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती का कार्यकाल और उनका प्रशासनिक सफर विवादों से भरा रहा, चारा घोटाला मामले में उन्हों सजा काटनी पड़ी. अब इस फेरहिस्त में एक और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्याते का नाम जुड़ गया है, जो वर्तमान में CID की रडार पर हैं. 14वीं JPSC परीक्षा में हुई गंभीर गड़बड़ियों और घपलों को लेकर उनसे गहन पूछताछ की जा रही है.
K.K. खंडेलवाल और 13 बार का पत्राचार
अपर मुख्य सचिव पद पर आसीन रहे केके खंडेलवाल पर लगे आरोपों की फेहरिस्त भी कम लंबी नहीं है. उनके विरुद्ध निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (बिहार, पटना) में निगरानी जांच संख्या एएस 01/99 के तहत विभिन्न गंभीर आरोपों के लंबित होने की सूचना ने प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया था. इस मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस संदर्भ में अद्यतन स्थिति प्राप्त करने के लिए झारखंड ब्यूरो द्वारा पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को 13 बार पत्राचार किया गया.
प्रदीप कुमार से लेकर मनीष रंजन तक
IAS प्रदीप कुमार भ्रष्टाचार के मामलों में सीधे जेल गए. वहीं, IAS मनीष रंजन पर भी कई गंभीर मामलों में घिरे रहने और आरोपों की जद में आने के दाग लगे हैं. वहीं मनोज कुमार जब नगर निगम में मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर तैनात थे, तब उनके विरुद्ध झारखंड के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में पीई संख्या 17/15 दर्ज की गई थी. उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के लिए उनके प्रशासी विभाग के प्रधान सचिव को ब्यूरो द्वारा 4 मई 2017 को ही पत्र लिखा गया था, जो फाइलों में धूल फांकता रहा.
कैबिनेट नोट से छेड़छाड़ और के. श्रीनिवासन का प्रकरण
झारखंड सरकार ने 2005 बैच के IAS अधिकारी के. श्रीनिवासन को ताबड़तोड़ चार कारण बताओ नोटिस थमाए, जब वे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव पद पर तैनात थे. सरकार के नोटिस का जवाब न देने पर अंततः उन्हें पद से हटा दिया गया.श्रीनिवासन के प्रस्ताव पर कैबिनेट नोट में दो खतरनाक अतिरिक्त वाक्य जोड़े गए. झारखंड आश्रम और एकलव्य विद्यालय शिक्षा सोसायटी की प्रबंधन समिति की बैठक बुलाकर संबंधित गैर सरकारी संगठनों (एकलव्य विद्यालय चलाने वाले) को भुगतान पर निर्णय लिया जाएगा. लिए गए निर्णय के आलोक में संस्थानों को भुगतान किया जाएगा. जबकि प्रशासनिक नियमानुसार किसी भी कैबिनेट नोट के शब्दों या वाक्यों को बदलने के लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी पड़ती है.

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अन्य अधिकारियों के कारनामे
राजीव अरुण एक्का भी जांच के दायरे में रहे और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने रहे. सैयद रियाज अहमद पर छेड़खानी जैसे गंभीर आरोप लगे. IAS अधिकारी अनिल कुमार पलामू में बंदोबस्ती पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थे और नवंबर 2022 से पूरी तरह फरार चल रहे थे. साहिबगंज पुलिस को उनकी गिरफ्तारी के लिए दो बार पलामू दौड़ना पड़ा. अंततः साहिबगंज कोर्ट में आत्मसमर्पण/हाजिरी के बाद अनिल कुमार को साहिबगंज मंडल कारा भेज दिया गया था.
