Ranchi: झारखंड में मानसून के शुरुआती दो महीनों यानी 1 जून से 31 जुलाई के बीच सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. इस अवधि में पूरे राज्य का औसत वर्षापात सामान्य से 26% कम रहा है, जिससे किसानों और आम जनजीवन की चिंताएं बढ़ने लगी हैं. राज्य में इस साल समय पर बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपाई और कृषि कार्यों पर गहरा संकट मंडरा रहा है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 1 जून से 31 जुलाई तक सामान्य रूप से 508.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक रूप से मात्र 376.2 मिलीमीटर ही वर्षा दर्ज की गई.
सिर्फ पश्चिम सिंहभूम में सामान्य से अधिक बारिश
पूरे झारखंड में केवल एक ही ऐसा जिला रहा, जहां राहत की बूंदें गिरीं. पश्चिम सिंहभूम इकलौता जिला है, जहां सामान्य 493.6 मिलीमीटर के मुकाबले 573.7 मिलीमीटर यानी 16% अधिक वर्षा दर्ज की गई है. इसके अलावा पूर्वी सिंहभूम में 9%, सरायकेला-खरसावां में 7% और सिमडेगा में 3% कम बारिश दर्ज की गई है.

चतरा और गढ़वा में सबसे खराब स्थिति
गढ़वा और चतरा जिले मानसून की मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं. गढ़वा में सामान्य से 63% और चतरा में सामान्य से 62% कम बारिश हुई है. बोकारो में 36%, देवघर में 54%, गिरिडीह में 45%, गोड्डा में 48%, गुमला में 32%, हजारीबाग में 38%, कोडरमा में 49%, पलामू में 44% और पाकुड़ में 58% कम बारिश दर्ज की गई है. राजधानी रांची में भी सामान्य 521.7 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 439.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो 16% कम है.
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