palamu : किसी जमाने में अंतर्देशीय पत्र व पोस्टकार्ड ही अपनों तक सूचना पहुंचाने का सशक्त माध्यम हुआ करते थे. लेकिन आज के समय में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने संचार के लंबे समय से चले आ रहे तरीकों की जगह ले ली है. सदियों से चली आ रही डाकघरों में अंतर्देशीय पत्र और पोस्टकार्ड काफी अच्छी तरह से बिक रहे होते थे लेकिन आज के समय में एका दुका भी देखने को नहीं मिलता है. पहले संचार का माध्यम चिट्ठी हुआ करती थी और जिससे लोग मामूली कीमत पर पूरे देश में किसी तक भी अपनी बात पहुंचा देते थे.
कार्ड पर अपनी बात लिखकर पत्र पेटी में डाल दी जाती थी
एक कार्ड पर अपनी बात लिखकर पत्र पेटी में डाल दी जाती थी जो कुछ दिनों में अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचती थी. एक पत्र कार्ड आमतौर पर लिखे पत्र को उपयुक्त रूप से मोड़ कर और गोंद द्वारा चिपका कर इस्तेमाल किया जाने वाला एक पत्र है जो डाकखाने से खरीदा जा सकता थे. यह उचित मूल्य पर उपलब्ध था. इसका मूल्य कम ही होता है और आम जनता के लिए सस्ता व सुलभ माध्यम है. इसके भीतर कोई भी कागज या सामान रखने की अनुमति नहीं दी जाती थी. यह व्यापक प्रचार और प्रसार में है और यह मुफ्त ही हवाई संचरण द्वारा देश के भीतर ही प्रयोग किया जा सकता था.
50 पैसे वाले पोस्ट कार्ड का उपयोग
इसमें लोग ज्यादातर 025 पैसे वाले अंतर्देशीय पत्र पर टिकट 05,05, लगा रहता था. 50 पैसे वाले पोस्ट कार्ड का उपयोग करते थे, और उस पर महात्मागांधी जी के तस्वीरें हुआ करता था. लेकिन आज के दौर में एक बटन दबाने से ही आपकी बात दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाती है. नई-नई टेक्नोलाजी के आने से व अनिवार्यता होने पर लोग डाक सेवा का उपयोग करते हैं.


छात्र किसी भर्ती के लिए डाक का प्रयोग करते थे
छात्र किसी भर्ती के लिए करते हैं या व्यापारी सामान भेजने के लिए या किसी छोटे मोटे काम के लिए डाक का प्रयोग किया जाता है. अब हालात तो ये हैं कि जिले के प्रधान डाक घर में एक भी अंतर्देशीय पत्र कार्ड नहीं बचते थे. स्टेशन रोड के पोस्ट आफिस में अंतर्देशीय पत्र मांगने पर मौजूदा कर्मचारियों के पास से एक ही जबाव मिलता कि पिछले 4-5 साल से उन्होंने अंतर्देशीय कार्ड देखा तक नहीं और एक भी ग्राहक ये कार्ड मांगने भी नहीं आया. यही हालात लगभग सभी पोस्ट आफिसों पर धूल फांक रहे है.
Also Read : JSSC अभ्यर्थियों को बड़ा झटका, 836 लिपिक पदों की भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक
