Hazaribagh: ” संस्कृति नहीं तो भारतीय ज्ञान, संस्कार, सभ्यता और परंपरा का कोई अस्तित्व नहीं है. संस्कृत हम सभी की आत्मिक भाषा है, हमारा वैदिक मंत्रोच्चार है. इसे मिटाना राष्ट्रहित में सबसे बड़ा दुर्भाग्य है.” इन बेहद तीखे और गंभीर बयानों के साथ गुरुवार को हजारीबाग की सड़कें एक नए और बड़े भाषाई आंदोलन की गवाह बन गईं. झारखंड सरकार की नई ‘क्लस्टर नीति’ के नाम पर हजारीबाग के दो सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों-संत कोलंबा महाविद्यालय और के.बी. महिला महाविद्यालय में संस्कृत विभाग को बंद करने तथा नए नामांकन (एडमिशन) पर हमेशा के लिए रोक लगाने के सरकारी फरमान के खिलाफ हजारीबाग में छात्र-छात्राओं का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा है. ‘संस्कृत हिंदू जागृति मंच’ के बैनर तले सैकड़ों छात्र-छात्राएं और प्रोफेसर आज सड़कों पर उतर आए और एक विशाल आक्रोश जुलूस निकालकर समाहरणालय पहुंचे, जहां उन्होंने उपायुक्त को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपा.
“क्लस्टर नीति वापस लो” नारों से गूंजा समाहरणालय परिसर
गुरुवार की दोपहर हजारीबाग शहर के मुख्य मार्ग से निकला यह जुलूस जैसे ही समाहरणालय परिसर पहुंचा, वहां तैनात सुरक्षाकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी हैरान रह गए. जुलूस का नेतृत्व कर रहे संस्कृत हिंदू जागृति मंच के अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता और पीएचडी स्कॉलर्स के साथ सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं हाथों में तख्तियां लिए गगनभेदी नारेबाजी कर रहे थे. छात्रों का गुस्सा इस बात पर था कि सरकार आधुनिकता और नियमों के नाम पर हमारी सबसे प्राचीन और गौरवशाली भाषा का गला घोंटने पर आमादा है.

ग्राउंड जीरो से सीधी बात: “क्या क्लस्टर सिस्टम सिर्फ संस्कृत को खत्म करने के लिए आया है?”
आंदोलन के दौरान जब मीडिया और हमारे संवाददाता ने ग्राउंड जीरो पर छात्रों और वहां मौजूद प्रोफेसरों से बात की, तो इस पूरे ‘क्लस्टर सिस्टम’ के पीछे का एक बड़ा और चौंकाने वाला सच सामने आया. जब एक पीएचडी शोध छात्र (जो केबी महिला कॉलेज में अध्यापन कार्य भी करते हैं) और विनोबा भावे विश्वविद्यालय के संस्कृत शिक्षण सहायक से पूछा गया कि यह रैली क्यों निकाली गई है, तो उन्होंने बताया कि हेमंत सोरेन सरकार ने एक नया नियम निकाला है जिसे ‘क्लस्टर सिस्टम’ कहा जा रहा है. इस नियम के तहत कॉलेजों में विषयवार विभाजन होना है जैसे किसी एक कॉलेज में सिर्फ साइंस, किसी में सिर्फ आर्ट्स तो किसी में सिर्फ कॉमर्स की पढ़ाई होगी. नियम सुनने में ठीक लगता है, लेकिन हजारीबाग में इसके नाम पर बेहद घिनौना खेल हुआ है. पूरे क्लस्टर सिस्टम के नाम पर केवल और केवल ‘संस्कृत’ विषय को ही कॉलेजों से गायब कर दिया गया है! केबी महिला कॉलेज से सिर्फ संस्कृत हटाया गया, संत कोलंबा कॉलेज से भी संस्कृत बंद कर दिया गया. हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या आप क्लस्टर सिस्टम सिर्फ संस्कृत को निशाना बनाने के लिए लाए हैं?”
400 से अधिक छात्रों का भविष्य खतरे में, अब सीधे यूनिवर्सिटी का होगा घेराव
आंदोलनकारियों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि यह कोई मामूली मामला नहीं है. अकेले संत कोलंबा कॉलेज में 250 से 300 छात्र संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि केबी महिला कॉलेज में भी 100 से अधिक छात्राएं इस विषय से जुड़ी हुई हैं. अचानक विभाग बंद होने और नामांकन प्रक्रिया पर ताला लगने से इन सभी होनहार छात्र-छात्राओं का भविष्य पूरी तरह अंधकार में डूब गया है. छात्रों ने सीधे शब्दों में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भाषा हमारी संस्कृति, सभ्यता और सनातन धर्म का मूल आधार है, उसे झारखंड में बर्दाश्त नहीं होने दिया जाएगा. छात्रों ने कहा कि उपायुक्त को ज्ञापन सौंपना तो सिर्फ पहला कदम है, इसके तुरंत बाद यह पूरा आंदोलन विनोबा भावे विश्वविद्यालय मुख्यालय की ओर कूच करेगा. अगर कुलपति और सरकार ने इस मनमाने आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया और पूर्व की तरह नामांकन शुरू नहीं किया, तो छात्र उग्र आंदोलन और तालाबंदी के लिए विवश होंगे.
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