Palamu: झारखंड के पलामू जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो बंदूक की गूंज भी कलम की ताकत को नहीं दबा सकती. जिस स्कूल को नक्सलियों ने कभी दो बार डायनामाइट से उड़ाकर खंडहर बना दिया था, आज उसी स्कूल की छात्रा ने पूरे जिले का नाम रोशन किया है.
सफलता की कहानी
मनातु प्रखंड के चक अपग्रेडेड हाई स्कूल की छात्रा प्रीति कुमारी ने मैट्रिक परीक्षा में 97.8% अंक हासिल कर पलामू जिला टॉप किया है. प्रीति ने झारखंड के टॉप-10 में भी आठवां स्थान प्राप्त किया है. प्रीति के पिता संजय मालाकार चक में ही एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. अपनी सफलता का श्रेय अपनी 7-8 घंटे की मेहनत को देते हुए प्रीति ने बताया कि उसका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना है.
संघर्ष से सफलता तक का सफर
यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि चक का यह इलाका कभी नक्सलियों की ‘राजधानी’ कहा जाता था. नक्सलियों ने 1995 और 2006 में इस स्कूल को विस्फोट कर नष्ट कर दिया था. सालों तक यह इलाका मुख्यालय से कटा रहा, जहां जाने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन आज यहां की तस्वीर बदल रही है. जिस रास्ते पर सीआरपीएफ की मौजूदगी में सड़क बनी, आज उसी रास्ते से खुशियों और कामयाबी की खबर आ रही है.
पूरे इलाके की जीत
प्रीति की यह सफलता केवल एक छात्रा की जीत नहीं है, बल्कि उस पूरे इलाके की जीत है, जो दशकों तक हिंसा की चपेट में रहा. यह इस बात का प्रमाण है कि विकास और शिक्षा की लौ अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी उजाला कर रही है.
