विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: बोकारो की 18 वर्षीय युवती के पिछले 9 महीनों से लापता होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट काफी सख्त है और अदालत इस पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है. इस बीच हाईकोर्ट के पिछले आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एम एम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की बेंच में सुनवाई हुई.
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
दरअसल इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की अब तक की जांच पर गहरा असंतोष जताया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में पुलिस का रवैया सुस्त और संवेदनहीन रहा है. अब तक हुई सुनवाई में अदालत को सूचित किया गया कि पिंडराजोरा थाना प्रभारी समेत 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. इस पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल छोटे स्तर के कर्मियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने पूछा कि इस मामले की निगरानी कर रहे DSP, SP और DIG रैंक के अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
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कंकाल बरामदगी और जांच के निर्देश
पुलिस ने हाल ही में एक मानव कंकाल बरामद कर दावा किया था कि यह लापता युवती का हो सकता है. हालांकि याचिकाकर्ता (युवती की मां रेखा देवी) के वकील ने इस पर संदेह जताया है. कोर्ट ने नाराजगी जताई कि कंकाल मिलने के बावजूद तुरंत DNA टेस्ट क्यों नहीं कराया गया. हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि बरामद कंकाल के सैंपल और माता-पिता के DNA को सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) कोलकाता भेजा जाए. कोर्ट ने लेबोरेटरी को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कंकाल का पोस्टमार्टम रांची के RIMS में कराने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख मुकर्रर की है. अगली सुनवाई के दौरान बोकारो जोनल आईजी, बोकारो रेंज के DIG, बोकारो जिले के एसपी, सिटी डीएसपी और इस मामले की जांच कर रही SIT के अधिकारियों को सशरीर कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है.
