Ranchi / koderma: कोडरमा जिले के तिलैया थाना अंतर्गत एक हॉस्टल में छात्र उदित राज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. मृतक छात्र के पिता विजय कुमार यादव ने झारखंड के डीजीपी को एक विस्तृत आवेदन सौंपकर पुलिस प्रशासन की जांच पर असंतोष जताया है. पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उसकी बेरहमी से हत्या की गई है, जिसे पुलिस दबाने का प्रयास कर रही है.
तीन हफ्ते बाद भी पुलिसिया कार्रवाई से असंतुष्ट परिवार
डीजीपी को लिखे गए पत्र में लखीबागी, फरेन्दा (कोडरमा) के निवासी विजय कुमार यादव ने बताया कि यह घटना तीन मई 2026 की शाम करीब छह बजे की है. तिलैया थाना में इस संबंध में कांड संख्या-140/26 दर्ज है. पीड़ित पिता का कहना है कि घटना को बीते तीन हफ्ते से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन जब भी वे पुलिस से जांच के बारे में पूछते हैं, तो केवल अनुसंधान जारी है का रटा-रटाया जवाब मिलता है. प्रशासन की इस सुस्ती को देखते हुए पिता ने खुद मामले से जुड़े सबूतों की छानबीन की और कई चौंकाने वाले बिंदु सामने रखे हैं.

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पिता द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल और संदेहास्पद बिंदु
– पुलिस को सूचना दिए बिना शव को फंदे से उतारा गया पीड़ित पिता के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर जब उनका बड़ा बेटा आदित्य राज और भतीजा रोहित कुमार हॉस्टल पहुंचे, तो उदित राज का शव जमीन पर लेटा हुआ था. नियमतः किसी भी फांसी के मामले में पुलिस की मौजूदगी के बिना शव को छूना कानून का उल्लंघन है. स्कूल संचालक बिनोद सिंह, हॉस्टल मैनेजमेंटकर्ता राहुल सिंह और अन्य कर्मियों ने पुलिस को बिना सूचना दिए शव को फंदे से उतार दिया. न तो पुलिस ने और न ही परिजनों ने उदित के शव को फंदे से लटकते देखा.
– आवेदन में आरोप है कि हॉस्टल परिसर में फोर-व्हीलर गाड़ी मौजूद होने के बावजूद मैनेजमेंटकर्ता राहुल सिंह ने शुरुआत में पीड़ित परिवार को एम्बुलेंस का इंतजार करने को कहा. बाद में जब मृतक का भाई स्कूटी से शव को ले जाने लगा, तब मजबूरी में राहुल सिंह ने अपनी गाड़ी दी. घटना के तुरंत बाद से ही स्कूल व हॉस्टल के संचालक बिनोद सिंह मौके से फरार हैं, जिससे उनकी भूमिका पर गहरा संदेह पैदा होता है.
– पिता ने पत्र में घटनास्थल की बनावट पर तकनीकी सवाल उठाए हैं. हॉस्टल के कमरे में बेड की ऊंचाई लगभग दो फीट थी और जमीन से छत की ऊंचाई करीब 11 फीट थी. मृतक उदित राज की लंबाई 5.5 फीट थी. कमरे में पंखे तक पहुंचने के लिए कोई टेबल, टूल, कुर्सी या सीढ़ी नहीं पाई गई. ऐसे में बिना किसी सहारे के छात्र 11 फीट ऊंचे पंखे पर दो रंग के गमछों (नारंगी और सफेद) का फंदा कैसे लगा सकता है? मृतक के गले पर पाया गया निशान किसी चौड़े गमछे का नहीं, बल्कि एक पतली रस्सी का है, जो गले में पीछे तक गोलाकार रूप में गया है.
– शिकायतकर्ता के अनुसार, उदित राज के शरीर पर बर्बर मारपीट के साफ निशान थे, जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी होती है। शरीर पर निम्नलिखित चोटें पाई गईं. बाएं हाइड्रोसिल पर असामान्य सूजन और लाल रंग का होना (जैसे बेरहमी से दबाया गया हो). तलवे और घुटने के नीचे लाठी/डंडे से मारने के निशान.दोनों कानों में सूजन के साथ लाल और काला रंग पड़ जाना. दाहिनी आंख में खून जमना और चेहरे पर छोटे-छोटे मुक्के मारने के निशान. पेट पर उंगलियों के निशान (जैसे किसी ने जबरन दबोचा हो).
– हॉस्टल में दाखिले के वक्त संचालक ने दावा किया था कि छात्रों की सुरक्षा के लिए चारों तरफ कैमरे लगे हैं. लेकिन घटना के बाद जब रिकॉर्डर मांगा गया, तो कर्मियों ने कैमरा खराब होने का बहाना बना दिया, जिस पर पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया. सबसे गंभीर बात यह है कि छानबीन के दौरान हॉस्टल से 12 जिंदा कारतूस (गोली) बरामद हुए हैं. पिता का सवाल है कि शिक्षा के मंदिर में इन कारतूसों का क्या काम था? इससे प्रतीत होता है कि हॉस्टल की आड़ में कुछ गलत धंधा चल रहा था.
पैसे के बल पर केस को दबाने का प्रयास
पत्र के अंत में पीड़ित पिता ने हाथ से लिखे एक नोट में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सेक्रेड हार्ट स्कूल के डायरेक्टर प्रमोद सिंह एवं हॉस्टल संचालक बिनोद सिंह दोनों बेहद दबंग किस्म के व्यक्ति हैं. वे अपने धनबल और प्रभाव का इस्तेमाल कर इस पूरे मामले को दूसरा रूप देने (आत्महत्या साबित करने) का प्रयास कर रहे हैं. पिता ने पुलिस प्रशासन पर भी ढुलमुल रवैया अपनाने और दिलचस्पी न लेने का आरोप लगाया है. विजय कुमार यादव ने डीजीपी से गुहार लगाई है कि इस मामले को संज्ञान में लेते हुए उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, नामजद आरोपियों को कस्टडी में लेकर पूछताछ की जाए और उनके दिवंगत बेटे उदित राज को न्याय दिलाया जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसा क्रूर हादसा न हो.
