Ranchi: एनआइए मामले के विशेष न्यायाधीश AJC अभिमन्यु कुमार की अदालत ने मगध-आम्रपाली कोल परियोजना से टेरर फंडिंग और तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमिटी (टीएसपीसी) के लिए लेवी वसूली से जुड़े बहुचर्चित NIA मामले में आठ उग्रवादी सहित 12 आरोपियों को सजा सुनाई है. उन्हें आठ से दस साल की सजा और 40 से 90 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है. अदालत ने इस मामले के आरोपी CCL के तत्कालीन जनरल मैनेजर अजीत कुमार ठाकुर को बरी कर दिया था. मामले में उग्रवादी भिखन गंझू, कोहराम जी, आक्रमण जी सहित आठ नक्सली सहित 12 दोषियों को सजा दी गई है.
उग्रवादी भिखन गंझू सहित कई दोषी
मामले में NIA की ओर से दोषी करार दिए गए लोगों में भिखन गंझू, विनोद कुमार गंझू, प्रदीप राम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ ब्रजेश गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, कोहराम जी, आक्रमण जी उर्फ रविंदर गंझू, अनिश्चय गंझू, दीपु सिंह उर्फ भिखन, बिंदु गंझू उर्फ बिंदेश्वर गंझू और संजय जैन समेत अन्य नाम शामिल हैं.
क्या है मामला
यह मामला झारखंड के चतरा जिले के टंडवा क्षेत्र स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं में लेवी वसूली और प्रतिबंधित संगठन टीएसपीसी से जुड़े नेटवर्क की जांच से सामने आया था. मामले की शुरुआत टंडवा थाना कांड संख्या 2/2016 से हुई थी. बाद में केंद्र सरकार के निर्देश पर NIA ने जांच अपने हाथ में ली और टंडवा थाना का केस टेकओवर करते हुए मामला दर्ज किया था. इसके बाद मामला स्पेशल NIA केस के रूप में चला.
जांच एजेंसी का आरोप था कि कोयला परियोजनाओं में काम शुरू कराने और परिवहन से जुड़े मामलों में टीएसपीसी से जुड़े लोगों और स्थानीय कमिटियों के जरिए कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और डिलीवरी ऑर्डर धारकों से लेवी की वसूली की जाती थी. जांच में प्रति मीट्रिक टन 254 रुपये की वसूली के आरोप का भी उल्लेख अदालत के पुराने रिकॉर्ड में मिलता है.
हथियारों की बरामदगी को भी जांच का आधार बनाया गया था
मामले की शुरुआती जांच के दौरान एनआईए की कार्रवाई में भारी मात्रा में नकदी के साथ हथियार भी बरामद किए गए थे. 9 जुलाई 2018 को दर्ज मामले की जांच के क्रम में टीएसपीसी कमांडर कमलेश गंझू से जुड़े ठिकाने पर छापेमारी की गई थी. यहां से करीब 36 लाख रुपये नकद, 9 एमएम की पिस्टल, एके-47 राइफल समेत कई हथियार बरामद किए गए थे. जांच एजेंसी के अनुसार, हथियारों का इस्तेमाल दहशत कायम करने और कोल परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों से लेवी व रंगदारी वसूलने में किया जाता था.
2018 में NIA ने शुरू की थी जांच
NIA के रिकॉर्ड से जुड़े पुराने न्यायिक दस्तावेजों के मुताबिक, मामला 2018 में NIA के पास पहुंचा. जांच के दौरान टीएसपीसी से जुड़े आरोपियों के खिलाफ UAPA, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई थी.
मामले की जांच के दौरान टीएसपीसी नेटवर्क और कोयला परियोजनाओं से लेवी वसूली को लेकर कई आरोप सामने आए. NIA का आरोप था कि रंगदारी के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल उग्रवादी गतिविधियों को आर्थिक मदद पहुंचाने में किया जाता था.
