कोनार नदी के अस्तित्व पर ही संकट, एक महीने में चौथी बार फटी डीवीसी की ऐश पौंड पाइपलाइन, नदी में जमने लगी छाई की टीलानुमा सतह

Bermo: विकास और आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमारी जीवनदायिनी नदियां किस कदर घुट-घुट कर मरने को मजबूर हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण...

Konar river
कोनार नदी

Bermo: विकास और आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमारी जीवनदायिनी नदियां किस कदर घुट-घुट कर मरने को मजबूर हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण गुरुवार को एक बार फिर बोकारो थर्मल में देखने को मिला. बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी पावर प्लांट की लापरवाही के कारण मई महीने में चैथी बार ऐश पौंड की पाइपलाइन फट गई. इसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में छाई बहकर सीधे कोनार नदी में समा गई. प्रदूषण का आलम यह है कि कोनार नदी के पानी का रंग तो बदला ही, साथ ही नदी की सतह पर छाई इस कदर जमा हो गई है कि वह अब पानी के ऊपर टीले की तरह दिखाई दे रही है.

त्योहार और उद्घाटन की आड़ में बहता रहा जहर

घटना गुरुवार सुबह लगभग सात बजे की है. बाजार टांड़ स्थित शिव मंदिर के समीप, नूरी नगर ऐश पौंड को जाने वाली पाइपलाइन संख्या तीन अचानक फट गई. विडंबना देखिए कि गुरुवार को बकरीद का अवकाश था और दूसरी तरफ डीवीसी के रेलवे ओवरब्रिज के उद्घाटन को लेकर पूरा प्रबंधन और प्रशासनिक अमला जश्न व कार्यक्रमों में व्यस्त था. इसी व्यस्तता और लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि पाइप फटने के सात घंटे बाद भी दोपहर तक नदी में जहरीली छाई का बहाव बेरोक-टोक जारी रहा.

लंबे समय से बंद थी पाइपलाइन

सूत्रों के अनुसार तीन नंबर पाइपलाइन लंबे समय से बंद पड़ी थी. इसे बुधवार की शाम को ट्रायल के लिए चालू कर फिर बंद किया गया था. गुरुवार की सुबह जैसे ही इसे दोबारा चालू किया गया, यह दबाव झेल नहीं सकी और फट गई. इससे साफ है कि बिना उचित मेंटेनेंस और सुरक्षा जांच के ही इसे चालू कर दिया गया.

जब सरसों में ही भूत आ जाए,तो उसे कैसे भगाएं-सरयू राय

दामोदर बचाओ आंदोलन के केंद्रीय अध्यक्ष सह विधायक सरयू राय ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीवीसी प्रबंधन के गठजोड़ पर मामले के बाद तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा जो भी कानून का उल्लंघन करता है, उस पर कार्रवाई के लिए संस्थाएं बनी हैं. झारखंड में प्रदूषण नियंत्रण का जिम्मा प्रदूषण बोर्ड का है. लेकिन जब भी हम बोकारो थर्मल का मामला उठाते हैं, बोर्ड की टीम आती है, खानापूर्ति की जांच करती है और चली जाती है. आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इससे साफ शंका होती है कि बोर्ड और बोकारो थर्मल प्रबंधन के बीच कोई बड़ा घालमेल और सांठगांठ है. कहा कि अब समय आ गया है जब प्रदूषण बोर्ड के खिलाफ ही मामला एनजीटी या हाई कोर्ट में उठाना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कहावत है कि भूत भगाने के लिए सरसों छींटा जाता है, परंतु जब सरसों में ही भूत आ जाए तो उसे कैसे भगाया जा सकता है? झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थिति भी यही हो गई है.

जांच कर कार्रवाई करेंगे- एए कुजूर, जीएम

नदी में छाई बहाने के बाद डीवीसी प्रबंधन का रवैया हमेशा की तरह बेहद ढुलमुल और रटा-रटाया रहा. मामले पर डीवीसी के जीएम एए कुजूर ने कहा अगर छाई कोनार नदी में बह रही है, तो इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा. उस पर कार्रवाई करेंगे.

इस बार निश्चित रूप से कार्रवाई होगी- सौगाता महतो

झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिजनल कार्यालय, धनबाद के सौगाता महतो ने मामले में कहा कि पिछली बार जब बोकारो थर्मल का ऐसा मामला सामने आया था, तो बोर्ड के मुख्यालय रांची को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी. इस बार भी अगर ऐसा पाया गया है या जानबूझकर लापरवाही की गई है, तो इस पर भी निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. एक ही महीने में चार बार पाइपलाइन का फटना यह साबित करता है कि डीवीसी प्रबंधन के लिए पर्यावरण मानकों और आम जनता के स्वास्थ्य की कोई अहमियत नहीं है. कोनार नदी न सिर्फ एक जलस्रोत है, बल्कि इसके पानी से बड़े इलाके की आबादी की जिंदगी जुड़ी है. जहरीली छाई के इस कदर नदी में मिलने से जलीय जीवों का अस्तित्व तो समाप्त हो ही रहा है, साथ ही भूगर्भ जल के भी जहरीले होने का खतरा बढ़ गया है.

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