15 साल की सजा काट रहे अफीम तस्कर के सजा निलंबन की चौथी अर्जी भी खारिज, HC ने कहा – नशीले पदार्थों की तस्करी देश के लिये खतरा

Ranchi : हाईकोर्ट ने अफीम तस्करी के मामले में 15 साल की सजा काट रहे खूंटी निवासी कोंटा मुंडा की सजा निलंबित...

Ranchi : हाईकोर्ट ने अफीम तस्करी के मामले में 15 साल की सजा काट रहे खूंटी निवासी कोंटा मुंडा की सजा निलंबित करने की चौथी अंतरिम अर्जी खारिज कर दी. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायाधीश संजय प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि एनडीपीएस NDPS एक्ट के तहत दोषसिद्धि के बाद सजा निलंबित करने के लिए ठोस और अत्यंत मजबूत कारण होना आवश्यक है. सिर्फ साक्ष्यों में कथित विरोधाभास या स्वतंत्र गवाह नहीं होने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती. अदालत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार दोषसिद्धि के बाद निर्दोष होने की धारणा लागू नहीं होती. अपीलीय अदालत इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत पुनर्मूल्यांकन नहीं करती, बल्कि सिर्फ यह देखती है कि प्रथम दृष्टया सजा निलंबित करने का कोई मजबूत आधार बनता है या नहीं.

विशेष NDPS अदालत ने सुनाई थी सजा

मामला साल 2018 का है. जहां पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति भारी मात्रा में अफीम लेकर बिक्री के लिए जा रहा है. छापेमारी के दौरान पुलिस ने कोंटा मुंडा को पकड़कर उसके झोले से लगभग 6.005 किलोग्राम अफीम बरामद करने का दावा किया था. बाद में खूंटी की विशेष एनडीपीएस अदालत ने 30 जून 2022 को उसे 15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.50 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी.

अपीलकर्ता की दलील को मानने से हाईकोर्ट का इनकार

अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 का पालन नहीं किया गया. सभी गवाह पुलिसकर्मी है और कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है. साथ ही बरामदगी को लेकर गवाहों के बयानों में विरोधाभास बताया गया. खंडपीठ ने इन दलीलों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि तलाशी से पहले धारा 50 के तहत नोटिस दिया गया था. नमूने विधिवत लिए गए और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए. अदालत ने यह भी माना कि घटना तड़के सुबह हुई थी. इसलिए स्वतंत्र गवाह उपलब्ध नहीं होने की पुलिस की दलील प्रथम दृष्टया असंगत नहीं लगती.

आपराधिक अपील पर सुनवाई जारी रहेगी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दोहराया कि एनडीपीएस NDPS अधिनियम समाज को नशीले पदार्थों के खतरे से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया एक कठोर कानून है.इसलिए इसके प्रावधानों की उदार नहीं बल्कि उद्देश्यपरक और कड़ाई से व्याख्या की जानी चाहिए. इन सभी तथयों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कोंटा मुंडा की सजा निलंबन की चौथी अंतरिम अर्जी खारिज कर दी. मामले की मुख्य आपराधिक अपील पर सुनवाई बाद में जारी रहेगी.

 

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