रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन कई अहम मुद्दों पर सरकार और विधायकों के बीच चर्चा हुई. विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्य में अफीम की खेती और मादक पदार्थों की तस्करी के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरते हुए कहा कि अफीम की खेती में पुलिस और अपराधियों के संभावित गठजोड़ की जांच कराई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में अचानक यह आंकड़ा सामने आया कि 27015 एकड़ भूमि पर अफीम की खेती को नष्ट किया गया. आखिर यह आंकड़ा इतना अधिक कैसे बढ़ गया. इस पर मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि जैसे ही किसी प्रकार का इनपुट मिलता है, तुरंत कार्रवाई की जाती है. अगर कोई बड़ा से बड़ा पदाधिकारी भी इसमें संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
नक्सली गतिविधि और नियमावली संशोधन का मुद्दा.
विधायक सरयू राय ने कहा कि डीजीपी का कहना है कि राज्य में उग्रवाद का उन्मूलन हो चुका है और नक्सली अब सीमित क्षेत्रों में रह गए हैं. ऐसे में यह स्पष्ट किया जाए कि वे सीमित क्षेत्र कौन से हैं और सारंडा में नक्सली गतिविधियां बढ़ने का कारण क्या है. इस पर मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और उन पर अंकुश लगाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नक्सली अब केवल 10 से 20 प्रतिशत तक ही रह गए हैं और सरकार की सरेंडर पॉलिसी मील का पत्थर साबित हुई है. वहीं विधायक निरल पूर्ति ने झारखंड प्रशासनिक सेवा नियमावली में संशोधन की मांग उठाई, जिस पर वित्त मंत्री ने कहा कि विशेष सचिव रैंक के अधिकारियों को लेवल-14 का वेतनमान मिलेगा और संबंधित पद उसी श्रेणी में रखे गए हैं.

