झारखंड पुलिस एसोसिएशन को प्रतिवर्ष 42 लाख रुपए सिर्फ चंदे से हो रही आमदनी, हॉस्पिटल व जनकल्याण में खर्च करने की हो रही मांग
Ranchi: झारखंड पुलिस एसोसिएशन को प्रतिवर्ष सिर्फ चंदे से 42 लाख रुपए की आमदनी हो रही है. यह चंदा राज्य के पुलिसकर्मियों...
Ranchi: झारखंड पुलिस एसोसिएशन को प्रतिवर्ष सिर्फ चंदे से 42 लाख रुपए की आमदनी हो रही है. यह चंदा राज्य के पुलिसकर्मियों की वेतन से कटौती होती है. बताया जाता है कि हर माह के दस तारीख को सैलरी अकाउंट में आए या नहीं आए पचास रुपए अकाउंट से चंदा के नाम पर काट लिया जाता है. यह पैसा किस काम में खर्च किया जाता है, इसकी जानकारी पुलिसकर्मियों को नहीं दिया जाता है. पुलिस एसोसिएशन की इस प्रकार की हरकत से अपने ही लोगो(वर्दीधारी) में काफी नाराजगी है.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन की वित्तीय आय और उसके उपयोग को लेकर पुलिस महकमे में एक नई बहस छिड़ गई है. इस मोटी रकम के एकत्र होने के बाद अब संघ के भीतर और बाहर से इस कोष का उपयोग पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य, अस्पताल निर्माण और जन सरोकार के कार्यों में करने की मांग तेजी से मुखर होने लगी है.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन राज्य में पुलिस कर्मियों की सबसे बड़ी और प्रभावशाली संस्थाओं में से एक है. एसोसिएशन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, राज्य भर के हजारों पुलिस कर्मी हर महीने अपने वेतन का एक निश्चित हिस्सा एसोसिएशन के चंदे के रूप में देते हैं. यह छोटी-छोटी कटौती सालाना आधार पर करीब 42 लाख रुपए के फंड में तब्दील हो जाती. मिली जानकारी के अनुसार अब तक इस राशि का मुख्य उपयोग एसोसिएशन के प्रशासनिक कार्यों, बैठकों और चुनाव आदि में होता रहा है.
पुलिस कर्मियों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि इस चंदे की राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर जवानों और उनके परिवारों के कल्याण पर खर्च होना चाहिए. वर्तमान में पुलिस कर्मियों को ड्यूटी के दौरान कई तरह की गंभीर बीमारियों और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है. जवानों की मांग है कि एसोसिएशन इस फंड से एक पुलिस अस्पताल का निर्माण कराए, जहां पुलिस कर्मियों और उनके आश्रितों को मुफ्त या बेहद रियायती दरों पर बेहतर इलाज मिल सके.
पुलिस एसोसिएशन को प्राप्त हो रहे राशि का इस्तेमाल सही ढंग से होनी चाहिए. इस राशि को जन सरोकार के कार्यों से जोड़ने की भी वकालत की जा रही है. मांग उठ रही है कि एसोसिएशन को अपनी छवि केवल एक सेवा संघ तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन भी करना चाहिए. इसके तहत गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारों की मदद, आपदा के समय राहत कार्य को विकसित की जानी चाहिए.
इस मांग के पीछे एसोसिएशन के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने का उद्देश्य है. सामान्य सदस्यों का कहना है कि जब आमदनी लाखों में है, तो उसका ऑडिट रिपोर्ट और खर्च का पूरा ब्योरा नियमित रूप से सार्वजनिक होना चाहिए. जिससे पुलिस महकमे का मनोबल बढ़ेगा.
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