Ranchi : झारखंड पुलिस एसोसिएशन की कार्यशैली से वर्दीधारी नाराज हैं. वर्दीधारी अपने ही संगठन के क्रिया कलापों से अब नाराज चल रहे हैं और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई है. झारखंड पुलिस एसोसिएशन के क्रिया कलापों से सुलग रहा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है. राज्य के विभिन्न जिलों और इकाइयों में तैनात पुलिसकर्मी अपने ही संगठन की कार्यशैली से खासे नाराज हैं.
संगठन के सदस्यों का मुख्य आरोप है कि एसोसिएशन का वर्तमान नेतृत्व पुलिसकर्मियों की बुनियादी समस्याओं को सरकार और पुलिस मुख्यालय के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने में पूरी तरह विफल रहा है. नाराजगी की सबसे बड़ी वजह वर्दी भत्ता जैसे लंबित मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई न होना है. निचले स्तर के पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब भी अधिकारों की बात आती है, संगठन के पदाधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, जबकि धरातल पर कुछ भी नहीं बदलता.

पुलिसकर्मियों के आंखों से खून के आंसु निकल रहे हैं लेकिन देखने वाला कोई नहीं
पुलिसकर्मियों का कहना है कि झारखंड राज्य के कनीय पुलिस पदाधिकारियों को विगत 8-10 वर्षों से वर्दी भत्ता और राशन भत्ता नहीं मिल रहे हैं. वहीं झारखंड से सटे बिहार राज्य के पुलिसकर्मियों को वर्दी भत्ता 11 हजार और राशन भत्ता तीन हजार मिलते हैं. पुलिसकर्मियों ने बताया कि इन सभी की वजह से आंखों से खून के आंसु निकल रहे हैं लेकिन देखने वाला कोई नहीं.
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इस मुद्दा को पुलिस एसोसिएशन के द्वारा उठाया भी नहीं जाता है ताकि सरकार का ध्यान खींच सके. पुलिस कर्मी का कहना है संघ का चंदा हर माह वेतन से कटौती की जा रही है. संघ की आमदनी चालू है, तथा सदस्यों के हक को हकमारी की जा रही है। जो अब बर्दाश्त से बाहर की बात है.
ड्यूटी के घंटों की कोई निश्चित सीमा न होने के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है. कर्मियों का आरोप है कि एसोसिएशन के केंद्रीय पदाधिकारी केवल अपने रसूख और काम में व्यस्त हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस कर्मी ने बताया, वर्दी वाले अनुशासन में बंधे हैं, इसलिए सड़क पर नहीं उतरते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपनी ही संस्था के हाथों ठगे जाएं.
एसोसिएशन हमारी ढाल बनने के लिए था, लेकिन अब यह केवल एक औपचारिक ढांचा बनकर रह गया है. फिलहाल, इस आंतरिक कलह ने झारखंड पुलिस महकमे में हलचल तेज कर दी है.
