विभावि में अब स्नातकोत्तर स्तर पर लागू होगी नई शिक्षा नीति 2020, तीन बाह्य विशेषज्ञ के साथ आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक

Hazaribagh : विभावि में अब स्नातकोत्तर स्तर पर लागू होगी नई शिक्षा नीति 2020, तीन बाह्य विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में नई...

Hazaribagh : विभावि में अब स्नातकोत्तर स्तर पर लागू होगी नई शिक्षा नीति 2020, तीन बाह्य  विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत स्नातकोत्तर के लिए पाठ्यक्रम एवं क्रेडिट रूपरेखा निर्धारित करने हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक का आयोजन मंगलवार को किया गया. बैठक का आयोजन कौटिल्य भवन में अवस्थित मनोविज्ञान विभाग के प्रयोगशाला में किया गया. बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने किया.

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत विभावि में पीजी पाठ्यक्रमों की नई रूपरेखा पर मंथन

बैठक की जानकारी देते हुए समिति के संयोजक तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभावि संयोजक डॉ इंद्रजीत कुमार ने कहा कि12 जून 2024 को जारी केंद्रीय अनुदान आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार बैठक में विमर्श किया गया, बताया कि विश्वविद्यालय के स्नातक स्तर पर नई शिक्षा नीति 2020 का पाठ्यक्रम पूरी तरह से लागू कर दिया गया है. अब 2026-27 सत्र से एक-वर्षीय स्नातकोत्तर तथा 2026-28 सत्र से दो-वर्षीय स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए नए पाठ्यक्रम तथा क्रेडिट रूपरेखा पर विमर्श किया गया. उन्होंने बताया कि जम्मू एवं कश्मीर राज्य के यूनिवर्सिटी ऑफ़ जम्मू के प्रो पंकज श्रीवास्तव, इग्नू के स्कूल ऑफ साइंस के प्रो सुदीप झा तथा मेघालय के नेहूं के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो रमेश शर्मा बतौर बाह्य विशेषज्ञ बैठक को सुशोभित किए.

विश्वविद्यालय में नए पाठ्यक्रम प्रारूप पर विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव

बैठक में डॉ इंद्रजीत कुमार ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया प्रारूप को सब के समक्ष प्रस्तुत किया. तीनों बाह्य विशेषज्ञ ने अपनी अनुभव और ज्ञान से बैठक में अमूल्य योगदान दिए. तय हुआ कि नए पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक समसत्र में अब पांच पत्रों की पढ़ाई करवाई जाएगी. हर पत्र चार क्रेडिट का होगा. इस प्रकार प्रत्येक समसत्र का कुल क्रेडिट 20 होगा. इसमें कोर्स वर्क और प्रोजेक्ट या शोध प्रबंध पर बल दिया गया. बैठक में भूगोल विभाग के अध्यक्ष डॉ सरोज कुमार सिंह तथा गणित विभाग के अध्यक्ष डॉ गोविंद झा कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए. नपांच-वर्षीय इंटीग्रेटेड स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम को लागू करने का भी प्रस्ताव लिया गया, बताया गया कि यह सिंगल कैंपस विश्वविद्यालयों में लागू करना जितना आसान है, एफिलिएटिंग यूनिवर्सिटीज में लागू करना उतना आसान नहीं है. इसका मुख्य कारण है कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय जैसे एफिलिएटिंग यूनिवर्सिटी में स्नातक की पढ़ाई महाविद्यालयों में होती है. कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को छोड़कर विश्वविद्यालय विभागों में सिर्फ स्नातकोत्तर की पढ़ाई होती है.

विश्वविद्यालय के नए पाठ्यक्रम प्रारूप पर  विशेषज्ञों के साथ हुआ मंथन

डॉ इंद्रजीत कुमार ने बताया कि पाठ्यक्रम तथा क्रेडिट रूपरेखा के निर्धारण के उपरांत सभी विभाग के पाठ्यक्रम समिति का गठन किया जाएगा. स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रम को नई नियमावली के अनुसार निर्धारित करने का कार्य विभागीय पाठ्यक्रम समितियों के द्वारा संपन्न होगा. इसमें भी बाह्य विषय विशेषज्ञ से परामर्श लिया जाएगा. विभागों द्वारा पाठ्यक्रम निर्धारण कर लेने के उपरांत इस पूरी प्रक्रिया को विश्वविद्यालय के विद्वत परिषद के अनुमोदन हेतु परिषद की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा. बैठक में विभिन्न संकाय के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्षगण तथा विश्वविद्यालय का परीक्षा नियंत्रक उपस्थित हुए. सहायक दीपू कुमार ने तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया. मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक तथा विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ सादिक रज्जाक ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

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