Ranchi: झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और डुमरी (गिरिडीह) के पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) मो. शहजाद परवेज के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही का पटाक्षेप हो गया है. सरकार ने उन्हें उन गंभीर आरोपों से मुक्त कर दिया है.
क्या थे मो. शहजाद परवेज पर लगे गंभीर आरोप
- अतिक्रमण पर चुप्पी और मिलीभगत का अंदेशा: आरोप था कि डुमरी में पदस्थापन के दौरान, एनएच बाईपास परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि (मौजा इसरी बाजार) पर अवैध कब्जा और निर्माण की जानकारी होने के बावजूद, उन्होंने इसे रोकने के लिए कोई ठोस विधिक कार्रवाई नहीं की.
- अवैध भू-हस्तांतरण को बढ़ावा: उन पर आरोप लगा कि उनके उदासीन रवैये के कारण सरकारी अधिग्रहित भूमि का अनधिकृत हस्तांतरण और दाखिल-खारिज होता रहा, जिससे अतिक्रमणकारियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई.
- भयादोहन के गंभीर आरोप: सबसे गंभीर आरोप यह था कि उन्होंने मौखिक निर्देशों की आड़ में भू-हितधारकों से भयादोहन का प्रयास किया, जिससे सरकार की लोक-कल्याणकारी छवि धूमिल हुई.
- आचार नियमावली का उल्लंघन: इन कृत्यों को ‘सरकारी सेवक आचार नियमावली’ के नियम 3(1)(i) और (ii) के तहत गंभीर कदाचार और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा का अभाव माना गया.

अधिकारी का बचाव में क्या कहा
अपने बचाव में मो. शहजाद परवेज ने इसे एक एकतरफा कार्रवाई करार दिया.उन्होंने तर्क दिया कि विवादित भूमि की खरीद-बिक्री उनके पदस्थापन से पहले ही हो चुकी थी.उन्होंने अतिक्रमण रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर निर्देशित किया था, लेकिन एनएचएआइ द्वारा अधूरी सूचना देने के कारण कानूनी कार्रवाई में बाधा उत्पन्न हुई.विधानसभा चुनाव की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने मौखिक रूप से कार्य रुकवाने का प्रयास किया था.
सरकार ने माना आरोप साबित नहीं हुए
गिरिडीह के उपायुक्त द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि मो. शहजाद परवेज के पदस्थापन के दौरान अतिक्रमण रोकने के प्रयास किए गए थे और उनके खिलाफ भयादोहन का कोई भी ठोस साक्ष्य नहीं मिला. समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने मो. शहजाद परवेज को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है. कार्मिक ने इसका आदेश जारी कर दिया.


