Ranchi: झारखंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. राज्य में 125 ऐसे सरकारी विद्यालय हैं, जहां एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है, लेकिन इन स्कूलों में 43 शिक्षक पदस्थापित हैं. इन शिक्षकों के वेतन पर राज्य सरकार हर महीने करीब 15 लाख रुपये से अधिक खर्च कर रही है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डायस (UDISE) 2025-26 रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
एक साल में 16 फीसदी बढ़े बिना छात्रों वाले स्कूल
यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य में 107 स्कूल ऐसे थे, जिनमें कोई भी छात्र नामांकित नहीं था. वहीं, 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 125 हो गई. यानी एक साल में ऐसे स्कूलों की संख्या में करीब 16 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. इससे साफ है कि कई इलाकों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है.

एक शिक्षक के भरोसे चल रहे 9,827 स्कूल
राज्य में सिर्फ शून्य नामांकन वाले स्कूल ही चिंता का विषय नहीं हैं, बल्कि एक शिक्षक वाले विद्यालयों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. यू-डायस रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, झारखंड के 9,827 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि इन विद्यालयों में 4,40,346 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं. इनमें अधिकांश प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है. ऐसे स्कूलों में सभी कक्षाओं की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक के कंधों पर है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है.
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दो वर्षों में तेजी से बढ़े एकल शिक्षक वाले स्कूल
| वर्ष | एक शिक्षक वाले स्कूल | नामांकित विद्यार्थी |
| 2023-24 | 7,642 | 3,78,898 |
| 2024-25 | 9,178 | 4,36,480 |
| 2025-26 | 9,827 | 4,40,346 |
आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले दो वर्षों में करीब दो हजार स्कूल ऐसे हो गए हैं, जहां केवल एक शिक्षक ही कार्यरत है.
बिना विद्यार्थियों वाले स्कूलों की स्थिति
| वर्ष | शून्य नामांकन वाले स्कूल | कार्यरत शिक्षक |
| 2022-23 | 370 | 1,368 |
| 2024-25 | 107 | 31 |
| 2025-26 | 125 | 43 |
12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति के बावजूद नहीं सुधरी स्थिति
राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में करीब 12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की है. इसके बावजूद एकल शिक्षक वाले विद्यालयों की संख्या बढ़ती जा रही है. इसकी बड़ी वजह यह है कि जितने शिक्षक नियुक्त हो रहे हैं, उससे अधिक संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसके अलावा सेवानिवृत्त पारा शिक्षकों के स्थान पर नई नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं होने से भी समस्या गहराती जा रही है. वर्तमान में राज्य में करीब 50 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं.
शिक्षा विभाग ने जिलों से मांगी रिपोर्ट
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पिछले वर्ष सभी जिलों को पत्र भेजकर शून्य नामांकन वाले विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकता का आकलन करने का निर्देश दिया था. विभाग ने जिलों से कहा था कि ऐसे विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा कर उनके संचालन को लेकर उचित निर्णय लिया जाए. हालांकि, ताजा रिपोर्ट बताती है कि इस दिशा में अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है.


