Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक गलियारों से लेकर सड़क तक इन दिनों सियासी और छात्र आंदोलनों की हलचल तेज हो गई है. एक तरफ जहां विभिन्न छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर मुखर हैं, वहीं दूसरी तरफ JSSC-CGL परीक्षा पास करके पिछले कई महीनों से अपनी सेवाएं दे रहे करीब 2,000 सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों के सिर पर बेरोजगारी की तलवार लटक गई है. अपने भविष्य को सुरक्षित रखने और सामूहिक रूप से परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में सोमवार को चयनित कर्मियों ने राजधानी रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया.

क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ी चिंता
गौरतलब है कि कुल 2,025 पदों के लिए बहुप्रतीक्षित JSSC-CGL 2023 की मुख्य परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित की गई थी. इसके बाद लंबी प्रक्रिया और कानूनी दांव-पेंच के बीच 8 दिसंबर 2025 को इस परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए थे. हालांकि, उस दौर में भी परीक्षा और उसके संचालन को लेकर कई तरह के विवाद देखने को मिले थे, जिसके चलते तत्कालीन JSSC चेयरमैन को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था. इसके बावजूद, सभी बाधाओं को पार करते हुए गत 30 दिसंबर 2025 को सफल अभ्यर्थियों को आधिकारिक तौर पर नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे. चयनित कर्मचारियों का कहना है कि पिछले लगभग सात महीनों से झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
व्यक्तिगत जांच मंजूर, लेकिन सामूहिक सजा गलत
प्रोजेक्ट भवन के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी स्तर की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उनका तर्क है कि यदि किसी विशेष अभ्यर्थी या प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उस पर व्यक्तिगत कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा को सिरे से रद्द कर देना हजारों मेहनतकश युवाओं और उनके परिवारों के साथ अन्याय होगा. प्रदर्शन में शामिल कई युवाओं ने दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्होंने JSSC-CGL के माध्यम से सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए अपनी पिछली स्थिर नौकरियां छोड़ दी थीं. इसके अलावा, इस पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें भारी मानसिक तनाव, लंबा संघर्ष और सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी, तब जाकर उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ था.
भविष्य को लेकर असमंजस और परिवारों की उम्मीदें
चयनित कर्मियों का मुख्य सवाल यह है कि यदि सरकार या प्रशासन के किसी निर्णय के तहत पूरी परीक्षा रद्द की जाती है और उनकी सेवाएं समाप्त होती हैं, तो उनके परिवारों का भरण-पोषण कैसे होगा? उनका कहना है कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और योग्यता के आधार पर परीक्षा उत्तीर्ण की है. ऐसे में सामूहिक कार्रवाई से उन ईमानदार युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाएगा जिन्होंने वर्षों तक दिन-रात मेहनत कर इस सफलता को प्राप्त किया था.
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