झारखंड से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: 45 साल पुराने डबल मर्डर केस में न्यायिक तंत्र की विफलता पर जताई चिंता, 70 वर्षीय बुजुर्ग की सजा निलंबित

Ranchi: झारखंड के 45 साल पुराने एक चर्चित दोहरे हत्याकांड पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश की न्यायिक प्रक्रिया में...

Supreme Court's sharp remarks on a Jharkhand-related case: Expresses concern over the failure of the judicial system in a 45-year-old double murder case

Ranchi: झारखंड के 45 साल पुराने एक चर्चित दोहरे हत्याकांड पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश की न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अत्यधिक देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. शीर्ष अदालत ने इस पूरे मामले को ‘न्यायिक तंत्र की विफलता’ करार देते हुए 70 वर्षीय एकमात्र जीवित आरोपी की सजा को निलंबित कर उन्हें रिहा करने का आदेश जारी किया है.

हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर सख्त सवाल उठाए. अदालत ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि केवल अपील पर फैसला सुनाने में ही हाई कोर्ट को दो दशक (22 साल) से अधिक का समय लग गया. पीठ ने कहा कि यह मामला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कैसे एक संगीन अपराध अंततः बिना सजा के रह गया, क्योंकि आरोपियों को 22 साल लंबे ट्रायल का सामना करना पड़ा और उसके बाद अपील खारिज होने में 22 साल और बीत गए.

1981 का मामला: जानें क्या थी घटना?

यह पूरा मामला 18 अक्टूबर 1981 का है, जो दुमका जिले के भुरुंडिया गांव से जुड़ा है. विभूति मंडल और बनारसी मंडल अपने परिवार के साथ खेत में धान की कटाई कर रहे थे.उसी दौरान पारंपरिक हथियारों से लैस एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें विभूति और बनारसी मंडल की मौत हो गई. मामले में साइमन सोरेन समेत कुल छह लोगों को नामजद किया गया था.

लंबे ट्रायल के दौरान पांच आरोपियों की मौत

यह कानूनी लड़ाई इतनी लंबी खिंची कि न्याय मिलने से पहले ही कई आरोपियों की मौत हो गई. आरोप तय होने से पहले ही दो आरोपियों की मौत हो गई. अपील लंबित रहने के दौरान तीन अन्य दोषियों ने भी दम तोड़ दिया. 70 वर्षीय साइमन सोरेन ही इस मामले के एकमात्र जीवित आरोपी बचे हैं, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और अस्पताल में भर्ती हैं. (उन्हें 2002 में ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद दी थी, जिसे 2024 में हाई कोर्ट ने बरकरार रखा, जिसके बाद उन्होंने सरेंडर किया था).

स्वास्थ्य और 45 साल की पीड़ा को देखकर मिली रिहाई

बचाव पक्ष की वकील फौजिया शकील की दलीलों से सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की दोहरे हत्याकांड जैसे गंभीर अपराध के बावजूद, हम आरोपी द्वारा पिछले 45 वर्षों में झेली गई मानसिक-शारीरिक पीड़ा और उनके गिरते स्वास्थ्य को अनदेखा नहीं कर सकते. अदालत ने नोट किया कि 45 वर्षों में साइमन ने कुल मिलाकर दो साल, 4 महीने और 12 दिन ही हिरासत में बिताए हैं. कोर्ट ने उन्हें बिना कोई नया अपराध करने की शर्त और निजी मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया.

अदालतें बदलने और लेटलतीफी के आंकड़े

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल और अपील में हुई देरी के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए.

केंद्र सरकार को बनाया पक्षकार, 18 सितंबर को अगली सुनवाई

आपराधिक अपीलों के इस भारी बैकलॉग को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मामले में पक्षकार बनाया है. शीर्ष अदालत ने निचली अदालत और हाई कोर्ट से 4 सप्ताह के भीतर मामले के मूल रिकॉर्ड (फिजिकल और डिजिटल) तलब किए हैं. मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की गई है और अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी या सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.

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