क्रिकेट डिप्लोमेसी के पीछे टेरर फंडिंग का घिनौना चेहरा: शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ पर गंभीर आरोप, पूर्व MHA अधिकारी का बड़ा दावा

News Wave Desk: भारत-पाकिस्तान के बीच कभी अमन और दोस्ती का जरिया माने जाने वाले क्रिकेट दौरों को लेकर एक बेहद चौंकाने...

The ugly face of terror funding behind cricket diplomacy: Serious allegations against Shoaib Akhtar and Mohammad Asif, a major claim by a former MHA official

News Wave Desk: भारत-पाकिस्तान के बीच कभी अमन और दोस्ती का जरिया माने जाने वाले क्रिकेट दौरों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला सुरक्षा विश्लेषण सामने आया है. गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने दावा किया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ, क्रिकेट डिप्लोमेसी की आड़ में भारत के खिलाफ ड्रग्स और टेरर का नेटवर्क चला रही थी. भारत आने वाले पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडलों और क्रिकेटरों का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाने के लिए किया जाता था.

खेल कूटनीति की आड़ में ISI का ड्रग्स नेटवर्क

आरवीएस मणि (वर्ष 2006-2010 के दौरान आंतरिक सुरक्षा डिवीजन के अधिकारी) के अनुसार, पाकिस्तान के साथ पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट महज एक छलावा था. उन्होंने सुरक्षा इनपुट्स के हवाले से बताया कि भारत में होने वाले आतंकी हमलों की फंडिंग का लगभग 30 फीसदी हिस्सा ड्रग्स तस्करी से आता है. इस पूरे सिंडिकेट को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ऑपरेट करती थी, जो खेल और सांस्कृतिक दौरों का फायदा उठाकर सीमा पार नशीले पदार्थों की सप्लाई सुनिश्चित करती थी. उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय के भीतर यह एक स्थापित तथ्य था कि अफगानिस्तान के जलालाबाद में अफीम की फसल जितनी अच्छी होगी, भारत में आतंकी हमलों का खतरा उतना ही बढ़ जाएगा, क्योंकि इसी रास्ते से टेरर फंडिंग की कड़ियां जुड़ती थीं.

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शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ पर गंभीर आरोप

• हाई-प्रोफाइल चेहरों का इस्तेमाल: शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे मशहूर खिलाड़ी जब भी भारत दौरे पर आते थे, तो वे ड्रग्स की खेप साथ लेकर आते थे.

• पूरी टीम की संलिप्तता: यह किसी खिलाड़ी का निजी कृत्य नहीं था. आशंका जताई गई है कि सुरक्षा जांच में मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए पूरी टीम और डेलिगेशन इस सुनियोजित तस्करी का हिस्सा होते थे.

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