मिट्टी की आवाज को मिला मंच: ‘कुरमाली प्रकीर्ण साहित्य’ के विमोचन ने जगाई पहचान की नई लौ

Bundu: पंच परगना किसान कॉलेज के सभागार में शुक्रवार का दिन सिर्फ एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय भाषा,...

Bundu: पंच परगना किसान कॉलेज के सभागार में शुक्रवार का दिन सिर्फ एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय भाषा, संस्कृति और पहचान के सम्मान का सशक्त संदेश बनकर उभरा. युवा साहित्यकार राजीव कुमार द्वारा रचित पुस्तक “कुरमाली प्रकीर्ण साहित्य” का लोकार्पण सिल्ली के विधायक अमित कुमार महतो और कुरमाली भाषा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद विधायक अमित कुमार महतो ने अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्रीय भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा है. उन्होंने इस कृति को आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बताते हुए लेखक के प्रयास को ऐतिहासिक पहल करार दिया. वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. राजाराम महतो ने इसे कुरमाली भाषा और साहित्य के लिए मील का पत्थर बताते हुए युवाओं से अपनी मातृभाषा के संरक्षण के लिए जागरूक रहने का आह्वान किया.

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‘जब क्षेत्रीय भाषाएं मजबूत होती हैं, तब समाज की जड़ें भी गहरी होती हैं’

मौके पर झारखंड प्रशासनिक सेवा की अधिकारी छवि बाला बरला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब क्षेत्रीय भाषाएं मजबूत होती हैं, तब समाज की जड़ें भी गहरी होती हैं. कार्यक्रम में डॉ. शकुंतला मिश्रा ने कुरमाली साहित्य में इस तरह के रचनात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, वहीं प्रो. भूतनाथ प्रमाणिक ने अपने गीतों से पूरे माहौल को भावनात्मक और ऊर्जावान बना दिया.

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मौके पर गणमान्य लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. विनिता कुमारी ने की और संचालन डॉ. सुमंत कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अरविंद कुमार साहू द्वारा दिया गया. इस अवसर पर मुक्ति पद महतो, देवेंद्र नाथ महतो, लखींद्र सिंह मुंडा, अधिवक्ता आनंद राम महतो, सुनील मानकी, डॉ. दीनबंधु, बंशीधर सहित अनेक गणमान्य लोग, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. यह आयोजन इस बात का प्रमाण बन गया कि जब शब्द अपनी मिट्टी से जुड़ते हैं, तो वे केवल साहित्य नहीं रचते—वे एक पूरी संस्कृति को जीवित रखते हैं.

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