नशे का मकड़जाल: भाभी जी के बाद अब मौसा जी बने ब्राउन शुगर के बड़े सप्लायर

Ajay Dayal Ranchi: राजधानी रांची में ब्राउन शुगर तस्करी मामले में सासाराम की भाभीजी का बड़ा नाम है. ब्राउन शुगर पर शिकंजा...

Ajay Dayal

Ranchi:  राजधानी रांची में ब्राउन शुगर तस्करी मामले में सासाराम की भाभीजी का बड़ा नाम है. ब्राउन शुगर पर शिकंजा कसने वाले कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय ने भाभी जी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. उसके बाद से भाभी जी सक्रिय नहीं रही तो उसी के संबंधी मौसा जी उर्फ बबन साह ने उनकी गद्दी संभाल ली. अब रांची के तस्कर मौसा जी से ही ब्राउन शुगर लेकर रांची में सप्लाई करते हैं. बबन साह के अलावा भाभी जी के अन्य संबंधी में पिंटू साह, सूरज साह भी ब्राउन शुगर के धंधे में आ गये. रांची के तस्कर अब उन लोगों से ब्राउन शुगर लाकर स्कूल और कॉलेजों के छात्रों को इसका आदि बना रहे हैं. ब्राउन शुगर का कोड वर्ड है पाउडर. सप्लायर या पैडलर के पास कोई ब्राउन शुगर खरीदने जाता है तो इसी कोड वर्ड का इस्तेमाल करता है.

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राजधानी रांची बना ब्राउन शुगर का हब

राजधानी वतर्मान में ब्राउन शुगर का हब बन गया है. सुखदेवगनर थाना क्षेत्र का इलाका गंगा नगर, विद्यानगर किशोरगंज, मधुकम इसके गढ़ के रूप में जाना जाता है. इसके अलावा राजधानी के अन्य जगहों पर अधिकतर सासाराम से ब्राउन शुगर लाकर सप्लाई करते हैं. पहले रूबी देवी उर्फ भाभी जी से ब्राउन शुगर लगाकर रांची में सप्लाई करते थे. काफी दिनों तक भाभी जी से रांची के ब्राउन शुगर सप्लायर नशे का धंधा चलाते थे. लेकिन आखिरकार भाभी जी को रांची पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेड दिया.

कभी कन्हैया की तूती बोलती थी

राजधानी में ब्राउन शुगर का सरगना कन्हैया की कभी तूती बोलती थी. उसे भी रांची पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था. गिरफ्तारी के बाद उसने कसम खाई थी कि वह उस धंधे की ओर मुड़ कर नहीं देखेगा. उसने गिरफ्तारी के बाद सभी पैडलरों से कहा था कि जो भी इस धंधे में लिप्त हैं, वे इससे तौबा कर लें. यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. एक साल के अंदर रांची पुलिस ने ब्राउन शुगर के 100 से अधिक तस्कर व पैडलर को जेल भेजा है. लेकिन वर्तमान में सरगना कन्हैया सहित कई मुख्य आरोपी पवन यादव, मोनू यादव, गांधी, प्रदीप सिंह सहित अधिकतर आरोपी जेल से बाहर निकल चुके हैं.

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ब्राउन शुगर से कमाया पैसा जमीन, गाय व भैंस में लगाया

ब्राउन शुगर से कमाया पैसा कन्हैया सहित अन्य आरोपियों ने जमीन में निवेश किया है. जमीन अपने नाम से नहीं बल्कि अपने संबंधी के नाम से खरीदा है, ताकि पुलिस को उनके अचल संपति के संबंध में कुछ पता नहीं चल सके. यादव ग्रुप के आरोपी गाय, भैंस खरीद लिया, जिससे कि उनका दूध का कारोबार काफी फल-फूल रहा है. कईयों ने डेयरी भी खोल लिया है. दूध से बनने वाले पनीर, दही, घी आदि का भी व्यवसाय शुरू कर दिया है. इससे उनकी काफी अच्छी कमाई हो रही है. हालांकि महंगी गाड़ियों का भी उन्हें शौक है, कुछ सप्लायरों ने महंगी गाड़ियां खरीदी भी, लेकिन वह भी अपने दूर के रिश्तेदारों के नाम से.

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