जिन्हें नौकरी मिली, उन्हें पता था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत CID जांच के आधार पर JSSC-CGL नियुक्ति होगी प्रभावित

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi: झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC CGL) में कथित गड़बड़ियों, धांधली और पेपर लीक के आरोपों...

विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi: झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC CGL) में कथित गड़बड़ियों, धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर कानूनी लड़ाई में झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई हो चुकी है. एक तरफ जहां झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और आयोग से सीआईडी जांच को काफी मानते हुए नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया था, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को राहत देते हुए स्पष्ट शर्त रखी थी कि सभी नियुक्तियां जारी आपराधिक जांच के अंतिम नतीजों के अधीन रहेंगी.

सुप्रीम कोर्ट की शर्त के बाद हुई नियुक्तियां

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद ही सरकार ने नियुक्तियां की. सबसे पहले JSSC CGL परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए अभ्यर्थियों और जनहित याचिकाओं (W.P.(PIL) No. 5717/2024 व WPS No. 1476/2025) के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था. याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि परीक्षा आयोजन में भारी अनियमितताएं हुई हैं.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

हाईकोर्ट के आदेश (दिनांक 03-12-2025) के खिलाफ याचिकाकर्ताओं प्रकाश कुमार एवं अन्य अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP (C) No. 38545-38546/2025) दाखिल की थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने याचिकाओं को खारिज करते हुए राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन अभ्यर्थियों के भविष्य और जांच की शुचिता को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी शर्त जोड़ दी.

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नियुक्तियां जांच के अंतिम परिणाम के अधीन

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि JSSC CGL के तहत अब तक जारी किए गए और भविष्य में जारी होने वाले सभी नियुक्ति पत्र जारी सीआईडी व पुलिस आपराधिक जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगे. जिसके बाद राज्य सरकार और कार्मिक विभाग को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले नियुक्ति पत्रों में इस शर्त का स्पष्ट रूप से उल्लेख करें.

इसलिए जिन लोगों को भी नियुक्ति दी गई, उन्हें नियुक्ति के समय से ही पता था कि भविष्य में जारी CID और पुलिस जांच या मुकदमों के अंतिम परिणाम में किसी भी तरह की धांधली या प्रतिकूल तथ्य साबित होते हैं, तो उसके आधार पर संबंधित नियुक्तियों पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी.

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