Hazaribagh: जिले का पेयजल एवं स्वच्छता विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार का ‘कुरुक्षेत्र’ बन गया है. आम जनता पानी की एक-एक बूंद और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, जबकि विभाग के भीतर सरकारी खजाने की बंदरबांट का ‘नंगा नाच’ जारी है. विशेष पड़ताल में PHED के भीतर चल रहे तीन ऐसे बड़े घोटालों का पर्दाफाश हुआ है, जिन्होंने विभाग की पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा दी हैं.
कागजी शौचालय : खंडहरों को ‘नया‘ बताकर डकार गए करोड़ों
जिले को ओडीएफ घोषित करने की इतनी जल्दी थी कि अधिकारियों ने धरातल पर निर्माण देखने की जहमत तक नहीं उठाई. कई प्रखंडों में सालों पुराने जर्जर शौचालयों पर नया पेंट कराकर उनकी फोटो पोर्टल पर अपलोड कर दी गई. एमआईएस एंट्री में भारी फर्जीवाड़ा कर सरकारी राशि निकाल ली गई. हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण लोटा लेकर खेतों की ओर जाने को मजबूर हैं.

जालसाजी की हद: फर्जी साइन से उड़ाए 14 लाख रुपये
भ्रष्टाचार का सबसे शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब विभागीय खजाने से फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे ₹14 लाख की अवैध निकासी कर ली गई. बिना किसी कार्य के फर्जी बिल-वाउचर तैयार किए गए और ट्रेजरी से पैसे पार कर दिए गए. सूत्रों की मानें तो इस महालूट में विभाग के ‘भीतरघाती’ सफेदपोशों का बड़ा हाथ है.
जलमीनार और सोखता गड्ढा: बिना काम के ही ठेकेदारों की ‘बल्ले-बल्ले‘
जिले में सोखता गड्ढे और जलमीनारों का निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. जांच में पाया गया कि दर्जनों गांवों में काम अधूरा है, लेकिन फाइलों में योजनाएं ‘100% पूर्ण’ दिखाकर भुगतान कर दिया गया है. जनता प्यासी है और ठेकेदार-बिचौलियों की जेबें गर्म हैं.
‘जांच होगी‘ वाला रटा-रटाया जवाब
जब इस महाघोटाले पर कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार प्रसाद गुप्ता से सवाल पूछे गए, तो उन्होंने परंपरागत जवाब देते हुए कहा— “मामला गंभीर है, जांच कराई जाएगी. जो भी दोषी होगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी.”
बड़ा सवाल
क्या यह जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी या करोड़ों की लूट करने वाले ‘सफेदपोश मगरमच्छ’ सलाखों के पीछे जाएंगे?
