RANCHI: झारखंड के स्वास्थ्य महकमे से एक साथ दो बड़ी खबरें सामने आई हैं.एक ओर जहां प्रशासन ने गुमला में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे एक निजी अस्पताल पर कार्रवाई की हैं, तो वहीं दूसरी ओर गढ़वा के सरकारी अस्पताल में अव्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है.
गुमला में अवैध गर्भपात के शक में अस्पताल सील, संचालक फरार
गुमला जिले के चैनपुर अनुमंडल मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है.गुरुवार की देर रात बस स्टैंड के समीप संचालित इस अस्पताल में पुलिस ने छापेमारी कर कथित अवैध गर्भपात के खेल का भंडाफोड़ किया. गुप्त सूचना के आधार पर SDPO के नेतृत्व में रात करीब नौ बजे पुलिस टीम वहां पहुंची.मौके पर मौजूद एक 21 वर्षीय युवती ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वह वहां गर्भपात कराने आई थी.
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया गया है. पुलिस ने अस्पताल संचालक ओमप्रकाश सिंह को रजिस्ट्रेशन और डिग्री से संबंधित कागजात के साथ थाने बुलाया था,लेकिन उनके न पहुंचने से मामला और संदिग्ध हो गया है. पुलिस फिलहाल दस्तावेजों की जांच कर रही है.
गढ़वा में बदहाल सदर अस्पताल, स्टैंड नहीं मिला तो हाथ में बोतल थामे रहे परिजन
वहीं दूसरी तरफ, गढ़वा जिले का सदर अस्पताल अपनी कुव्यवस्थाओं के कारण एक बार फिर चर्चा में है.यहां एक घायल युवक के परिजनों को अस्पताल की संवेदनहीनता और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा. धुरकी थाना क्षेत्र के बरसौती गांव निवासी दशरथ कुमार सिंह शुक्रवार को मोटरसाइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था.
वह अपने भाई बिनेश और बहन रूबी की शादी (जो 25 और 26 अप्रैल को होनी है) के लिए कपड़े खरीदकर लौट रहा था, तभी गाय को बचाने के चक्कर में उसकी बाइक अनियंत्रित हो गई. जब परिजन दशरथ को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे,तो वहां स्लाइन चढ़ाने के लिए एक स्टैंड तक उपलब्ध नहीं था. मजबूरी में परिजनों को घंटों हाथ में बोतल लेकर खड़े रहना पड़ा.
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