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तीन माह से मानदेय का इंतजार, हजारीबाग के मेयर-पार्षदों की बढ़ी मुश्किलें

Hazaribagh: नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद पिछले तीन माह से मानदेय एवं अन्य निर्धारित सुविधाओं के भुगतान का इंतजार...

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Hazaribagh: नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद पिछले तीन माह से मानदेय एवं अन्य निर्धारित सुविधाओं के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. भुगतान में हो रही देरी के कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को क्षेत्रीय विकास कार्यों की निगरानी और जनसमस्याओं के समाधान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

मानदेय का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है

नगर निगम नियमों के अनुसार मेयर को प्रतिमाह 10 हजार रुपये तथा पार्षदों को 7 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है. इसके अलावा पार्षदों को कार्यालय संचालन और जनसंपर्क कार्यों के लिए निजी सहायक, कार्यालय किराया, फर्नीचर तथा क्षेत्र भ्रमण हेतु पेट्रोल कूपन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है. निजी सहायक के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह और कार्यालय किराया मद में 4 हजार रुपये दिए जाने की व्यवस्था है. जानकारी के अनुसार निगम प्रशासन ने मेयर और डिप्टी मेयर को कार्यालय उपलब्ध करा दिया है, लेकिन मानदेय का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है. वहीं अधिकांश पार्षदों को कार्यालय संचालन एवं क्षेत्रीय निरीक्षण से जुड़ी सुविधाएं भी नहीं मिली हैं. ऐसे में कई पार्षद अपने निजी संसाधनों के सहारे वार्डों की समस्याओं का समाधान करने और लोगों की शिकायतें सुनने का कार्य कर रहे हैं.

भुगतान शीघ्र होने से वे विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगे

गौरतलब है कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े मामले के कारण नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं हो सका था. इसके चलते शहरी स्थानीय निकायों को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान पर भी असर पड़ा. बाद में आरक्षण विवाद के समाधान के बाद फरवरी 2026 में नगर निगम चुनाव संपन्न हुए. मार्च में चुनाव परिणाम घोषित हुए और अप्रैल में मेयर, डिप्टी मेयर तथा 36 पार्षदों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद से जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन तीन माह बीत जाने के बावजूद मानदेय और अन्य सुविधाओं का भुगतान नहीं हो सका है. जनप्रतिनिधियों का कहना है कि भुगतान शीघ्र होने से वे जनसेवा और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगे. अब नगर निगम प्रतिनिधियों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इस लंबित भुगतान और सुविधाओं के मामले का समाधान कब तक करता है.

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